बदहाली. लोगों के लिए मुसीबत बन गया तिलौथू-रोहतास राजमार्ग
पूर्व केंद्रीय मंत्री मीरा कुमार व केंद्रीय मंत्री केएच मुनियप्पा ने किया था शिलान्यास
तिलौथू (रोहतास) : तिलौथू-रोहतास राजमार्ग एनएच दो सी की सूरत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है. सड़क के निर्माण का लगभग दशक हो चुका है. इसकी मरम्मत की ओर किसी का ध्यान नहीं है. हालात यह है कि सड़क गड्ढे में तब्दील हो चुकी है. इस सड़क पर यात्रा जोखिम भरी है. इस सड़क से गुजरते हुए लोग अक्सर दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं. गड्ढों के बाद रही सही कसर बालू लदे ट्रकों से रिसता पानी पूरी कर दे रहा है.
वर्ष 2007 में घोषित हुआ था राजमार्ग: पूर्व केंद्रीय मंत्री मीरा कुमार व केंद्रीय मंत्री केएच मुनियप्पा ने वर्ष 2007 में राष्ट्रीय राजमार्ग टू सी का शिलान्यास किया था.
उस समय स्थानीय लोगों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी थी. लोगों के जेहन में यह ख्याल था कि राष्ट्रीय राजमार्ग की इतनी अनदेखी नहीं हो सकती है, इसलिए अपने बाल-बच्चे भी कम से कम सुकून से इस सड़क पर चलेंगे. करीब चार वर्ष तक इस सड़क पर वाहन सरपट चलते रहे. इसके बाद इसकी स्थिति दयनीय होती गयी. आज हालात यह है कि गड्ढों के किनारे लोग सड़क खोज रहे हैं.
सड़क के निर्माण को बीत चुका एक दशक
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
सरैया निवासी जमुना जायसवाल ने कहा कि सड़क की बदहाली के लिए बालू घाट से निकल रहे बालू लदे ट्रक जिम्मेदार हैं. एक तो ओवरलोडिंग और दूसरे बालू से भारी मात्रा में पानी के रिसाव होने से सड़क बदहाल हो गयी है.
जागोडीह निवासी व माले नेता अनिल सिंह ने कहा कि सड़क की बदहाल स्थिति के लिए जितना स्थानीय सांसद व विधायक जिम्मेदार हैं, उतना ही जिम्मेदार स्थानीय लोग भी हैं. सड़क के प्रति इनकी उदासीनता गजब की है. हादसे में स्थानीय लोगों को भी जान जाती है, लेकिन जब प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए धरना-प्रदर्शन करने की बात आती है तो वे साथ नहीं देते हैं.
छात्रा खुशबू कुमारी ने कहा कि कॉलेज आते-जाते सड़क के गड्ढों में बस हिचकोले खाती है, तो बहुत डर लगता है. राज्य की लगभग सभी सड़कों का निर्माण हो गया है, लेकिन स्थानीय जन प्रतिनिधियों की लापरवाही व अफसर शाही के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग टू सी की स्थिति बदतर हो गयी है.
क्या कहते हैं अधिकारी
कार्यपालक अभियंता उच्च मार्ग जितेंद्र कुमार ने कहा कि 40 किलोमीटर तक की सड़क के निर्माण के लिए 172.5 करोड़ रुपये का प्राक्कलन तैयार कर तकनीकी अनुमोदन के लिए दिल्ली भेजा गया है. प्रक्रिया पूरी होते ही काम शुरू कर दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि सड़क की बदहाली के लिए ओवरलोडिंग व बालू का पानी जिम्मेदार है. ओवरलोडिंग और बालू की ढुलाई बंद किये बिना सड़क को ठीक रखना संभव नहीं हैं.
