सुबह 11 बजे से शुरू हुआ हंगामा रात आठ बजे लाठीचार्ज के बाद शांत पड़ा
आंदोलन के कारण विवि का कामकाज पूरी तरह से ठप रहा
आरा : वीर कुंवर सिंह विवि में दो दिन पहले जारी हुए प्री-पीएचडी रिजल्ट में भी धांधली का आरोप एनएसयूआइ के नेताओं ने लगाया है. विवि में विरोध प्रदर्शन, हंगामा और लाठीचार्ज से पूरे दिन अफरातफरी का माहौल कायम रहा. सुबह 11 बजे से जो हंगामा बरपा वो रात लगभग 8 बजे पुलिस के लाठीचार्ज के बाद शांत पड़ा.
हालांकि लाठीचार्ज के बाद छात्रों में और उबाल आ गया है. एनएसयूआइ के कार्यकर्ताओं के समर्थन में कई अन्य दलों के छात्र संगठन भी विरोध का बिगुल फूंकने को तैयार हो गये हैं. सोमवार को आंदोलन के कारण कामकाज पूरी तरह ठप हो गया था. कुलपति को बंधक बनाने से पहले छात्रों ने विवि के अफसरों व कर्मचारियों को कार्यालय से बाहर निकाल दिया था. काफी देर तक बाहर इंतजार करने के बाद कर्मचारी वापस घर लौट गये, तो अधिकारी कुलपति के मुक्त होने का इंतजार करते रहे. विवि पदाधिकारियों के साथ एक बार छात्र नेताओं की वार्ता हुई, लेकिन कोई समझौता नहीं हुआ जिसके बाद छात्र उग्र हो गये और कुलपति को बंधक बना लिया. छात्र नेताओं ने बताया कि कुलपति से लगातार छात्र यह मांग कर रहे थे कि छात्रों के बीच आकर समस्याओं को सुने व उसका निराकरण करें, लेकिन कुलपति ने वार्ता करना उचित नहीं समझा, जिसके कारण स्थिति यहां तक पहुंच गयी. कुलपति से इस्तीफे की मांग करते हुए छात्र नेताओं ने उग्र आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है. इस प्रदर्शन में राहुल सिंह, श्रीकृष्ण हरि, सोनू यादव, विकाश, डुलडुल सिंह, संदीप कुमार, धनंजय सिंह, राणा प्रताप सिंह, आशीष कुमार, मोनू सिंह, राकेश कुमार, नीतीश कुमार, मुकुल सिंह, समीर श्रीवास्तव, झप्पू सिंह, राजाबाबू तिवारी, नवीन शंकर पाठक, सारंग कुमार, विनीत सिंह, लव कुमार सिंह, दीपेश श्रीवास्तव, आदित्य सिंह, विकाश मिश्रा, सागर श्रीवास्तव, गिरीश राय, पवन कुमार पाठक उर्फ सोनू पाठक, सुमित कुमार,उज्ज्वल सहित कई छात्र उपस्थित थे.
रेगुलेशन की भी उड़ायी गयीं धज्जियां : पूर्व विश्वविद्यालय अध्यक्ष डॉ अमित कुमार द्विवेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय के द्वारा जारी रिजल्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी दिख रही है. एक तरफ पूर्व की परीक्षाओं में दोनों पत्र में कम-से-कम 35 और कुल 100 का रेगुलेशन था, जबकि बिना किसी पूर्व सूचना के रेगुलेशन को बदल दिया गया. रिजल्ट प्रकाशन में कई छात्रों के अंकपत्र के अवलोकन के बाद देखा गया कि प्रथम पत्र में 85 और दूसरे पत्र में 20 आया है, बावजूद रिजल्ट प्रकाशित कर दिया गया है, जबकि नियम के मुताबिक कोई भी रेगुलेशन परिवर्तन करना हो तो कुलाधिपति से सहमति के साथ विवि के विद्वत परिषद् व सिंडिकेट से अनुमोदन भी लेना होता है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. विवि के एक कर्मी के बेटा और बेटी नियम विरुद्ध दे दिया गया है. सामान्य वर्ग के छात्रों को पास करने के लिए कम से कम कुल अंक 100 होना चाहिए, लेकिन उनके पुत्र का 93 अंक होने के बावजूद उन्हें उत्तीर्ण कर दिया गया जो एक जांच का विषय है.
कदाचार रोकने का विवि करता है केवल दावा : जिलाध्यक्ष अभिषेक द्ववेदी ने कहा कि परीक्षा कदाचार मुक्त लेने का विवि प्रशासन दावा मात्र करती है. परीक्षा में हर बार कदाचार हावी रहता है.
पीजी सेमेस्टर वन की परीक्षा चल रही है, जिसमें हर केंद्र पर खुलेआम परीक्षार्थी नकल कर रहे हैं. छात्र नेता ने कहा कि हाइकोर्ट का आदेश है कि परीक्षा केंद्र में छात्रों के घुसने के पहले गहन तलाशी ली जानी चाहिए तथा परीक्षा की वीडियोग्राफी भी होनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है.
