छठ व्रत को लेकर घाट की शुरू हुई सफाई

आरा : छठ पर्व के मद्देनजर घाटों की सफाई शुरू कर दी गयी है. बिहार के लिए सबसे महत्वपूर्ण पर्व छठ को ही माना जाता है. इसमें लोग साक्षात देव का सूर्य को अर्घ देकर अपनी मनोकामना पूर्ति की मांग करते हैं. नगर में छठ व्रतियों के लिए कई मुख्य छठ घाट हैं, जिसमें कलक्ट्री […]

आरा : छठ पर्व के मद्देनजर घाटों की सफाई शुरू कर दी गयी है. बिहार के लिए सबसे महत्वपूर्ण पर्व छठ को ही माना जाता है. इसमें लोग साक्षात देव का सूर्य को अर्घ देकर अपनी मनोकामना पूर्ति की मांग करते हैं. नगर में छठ व्रतियों के लिए कई मुख्य छठ घाट हैं, जिसमें कलक्ट्री तालाब, गांगी नदी, चंदवा सूर्य मंदिर तालाब, नवीन आरक्षी केंद्र तालाब, अहिरपुरवा, धरहरा, बहिरो, धोबी घटवा, पावरगंज स्थित सविता सूर्य मंदिर, आरा-डिहरी मेन कैनाल के किनारे बने छठ घाट सहित कई घाट हैं. इसके साथ ही अन्य कई छोटे-छोटे घाट भी बनाये जाते हैं.

छठपूजा को लेकर नगर में रहता है उत्सव का माहौल : छठ को लेकर पूरे नगर में उत्सव का माहौल बना रहता है. नगर के लगभग सभी घरों की महिलाएं तथा कई पुरुष भी छठ व्रत करते हैं. इस कारण पूरा नगर छठमय हो जाता है. छठ व्रत के लिए पूजा के विभिन्न पहलुओं में घाटों की सफाई भी महत्वपूर्ण होती है. प्रशासन तथा नगर निगम द्वारा संयुक्त रूप से छठ व्रतियों के लिए घाटों की सफाई करवायी जाती है. इसके मद्देनजर घाटों की सफाई का काम अभी से ही शुरू कर दिया गया है.
कलक्ट्री तालाब, जहां बड़ी संख्या में छठ व्रती इकट्ठा होते हैं, उसकी सफाई गुरुवार से शुरू कर दी गयी. तालाब में जमा जलकुंभी को हटाने का काम किया जा रहा है. क्षेत्र के वार्ड आयुक्त लल्लू कुमार द्वारा मजदूरों को लगाकर सफाई का काम शुरू कराया गया है. कलक्ट्री तालाब घाट के चारों तरफ पक्की सीढ़ी तो छठ व्रतियों की सुविधा के लिए बनवा दी गयी है, पर चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है.
गरमी में पानी की हो जाती है कमी : छठ व्रतियों के लिए घाट पर स्नान करने का प्रावधान होता है, पर पानी का श्रोत के नहीं होने के कारण तालाब का पानी धीरे-धीरे सूखने के कारण छठ व्रतियों को पर्व के समय स्नान करने में काफी असुविधा होती है. हालांकि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत प्रशासन तथा नगर निगम के द्वारा पंप सेट एवं बिजली के द्वारा नल से पानी भरा जाता है. फिर भी जितना पानी होना चाहिए, उतना नहीं हो पाता है. वहीं तालाब में पानी जमा रहने से गंदा हो जाता है, जिसमें छठ व्रतियों को स्नान करने में काफी कठिनाई होती है.
अंगरेजों के जमाने में नहर से जुड़ा था तालाब : अंगरेजों के जमाने में आरा-डिहरी मेन कैनाल से तालाब को जोड़ा गया था, ताकि पानी के आते-जाते रहने से पानी गंदा नहीं होता था. बहिरो के लख के पास से सदर अस्पताल के पीछे से करमनटोला होते हुए बड़ा नाला आकर तालाब में गिरता था. इसी से घोड़सवार पुलिस विभाग के घोड़ों को पानी पिलाया जाता था. पर बाद में नाले का अतिक्रमण कर लिया गया, जिससे पानी का आना-जाना बंद हो गया. इस कारण तालाब का पानी गंदा हो जाता है.
क्या कहते हैं अधिकारी
घाट की सफाई शुरू कर दी गयी है. छठ पर्व आते-आते इसे चकाचक कर दिया जायेगा, ताकि छठ व्रतियों को व्रत के समय कोई असुविधा न हो. इसके लिए निगम तत्पर है.
प्रमोद कुमार, नगर आयुक्त

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