चिकित्सकों की गुटबाजी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल
आरा : जिले के इकलौता आइएसओ से मान्यता प्राप्त सदर अस्पताल का इन दिनों बुरा हाल है. अस्पताल में 12 विशेषज्ञ चिकित्सक के होते हुए गत एक वर्ष से एक भी मेजर ऑपरेशन नहीं हुआ है. इसके कारण कोई भी सड़क दुर्घटना या ग्रामीण क्षेत्रों से रेफर होकर आनेवाले मरीजों काे अस्पताल में ऑपरेशन होने के बजाय निजी क्लिनिकों में इलाज कराना पड़ता है.
यही नहीं, सदर अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर में सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होते हुए भी पदस्थापित सर्जन मरीजों का मेजर ऑपरेशन करने से हाथ खड़े कर देते हैं. वहीं अस्पताल के चिकित्सकों के बीच व्याप्त गुटबाजी के कारण भी अस्पताल में दिन-प्रतिदिन बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने के बजाय कुव्यवस्था का आलम पसरता जा रहा है. नतीजतन मरीजों को अस्पताल में बेहतर इलाज मिलने के बजाय लापरवाही के शिकार होकर अपनी जान गंवानी पड़ रही है.
सीएस की अस्पताल प्रशासन पर पकड़ पड़ी ढ़ीली : अस्पताल प्रशासन पर सीएस की पकड़ ढीली पड़ गयी है. यही कारण है कि सीएस के प्रयासरत रहने के बावजूद अस्पताल की व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं. सीएस की आउटसोर्सिंग एजेंसी हो या संविदा चिकित्सक, नियमित चिकित्सक और कर्मी आदेश मानने को तैयार नहीं हैं. जब सीएस अनुशासनहीनता को लेकर कार्रवाई करने के लिए कदम बढ़ाते हैं, तो चिकित्सक और कर्मी गुटबाजी व यूनियनबाजी पर उतर आते हैं. इसके परिणामस्वरूप कार्रवाई का मामला अधर में लटक जाता है.
अस्पताल की कुव्यवस्था पर डीएम ने लिया संज्ञान
अस्पताल से संबंधित लगातार मिल रही शिकायतों से परेशान जिलाधिकारी डॉ वीरेंद्र प्रसाद यादव ने सीएस को अस्पताल से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट अनुशंसा के साथ भेजने का निर्देश दिया है. सीएस ने अस्पताल में व्याप्त चिकित्सकों की गुटबाजी और सर्जन चिकित्सकों के रहते अस्पताल में एक भी मेजर ऑपरेशन नहीं होने का भी विस्तार से उल्लेख करते हुए डीएम से कार्रवाई की अनुशंसा की है. वहीं सीएस ने अस्पताल में व्याप्त कुव्यवस्था से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट की कॉपी प्रधान सचिव, स्वास्थ्य विभाग को भी भेजी है.
