चंदवा मोड़ से नयी पुलिस लाइन तक एनएच तालाब में तब्दील

आरा : नगर की एक सड़क को सड़क कहने की जगह तालाब कहना उचित होगा. दो वर्ष से अधिक समय से चंदवा मोड़ से नयी पुलिस लाइन तक की सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. फिर भी सरकार द्वारा इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. हालात यह है की प्रतिदिन दोपहिया […]

आरा : नगर की एक सड़क को सड़क कहने की जगह तालाब कहना उचित होगा. दो वर्ष से अधिक समय से चंदवा मोड़ से नयी पुलिस लाइन तक की सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. फिर भी सरकार द्वारा इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. हालात यह है की प्रतिदिन दोपहिया वाहन चालक व अन्य वाहनों के चालक दुर्घटनाग्रस्त होते हैं व कई बार घायल भी हो जाते हैं.

बरसात में तो हालात और गंभीर हो गये हैं. सड़क और गड्ढे में फर्क करना मुश्किल हो जाता है. राष्ट्रीय राजमार्ग की गुणवत्ता पर लोगों को भरोसा होता है. पर उक्त सड़क के मामले में भरोसा टूटता नजर आ रहा है. सड़क की लंबाई लगभग एक किलोमीटर है.
वाहनों के फंस जाने से होता है सड़क जाम : सड़क पर बने गड्ढे के कारण आये दिन ट्रक व अन्य वाहन फंस जाते हैं. इस कारण सड़क पर वाहनों की कतार लग जाती है. सड़क जाम हो जाता है. सड़क पर जाम होने से लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. गंतव्य पर पहुंचने के लिए घंटों जाम हटने का इंतजार करना पड़ता है.
इस कारण आसपास के मोहल्लेवासियों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. सड़क जाम होने से दो पहिया वाहन चालक मोहल्ले की सड़कों से आना-जाना शुरू कर देते हैं. इसलिए मोहल्ले के बच्चों के दुर्घटनाग्रस्त होने का भय बना रहता है. अवधपुरी, उमानगर, वशिष्ठ पुरी, गौतम नगर आदि मोहल्ले के लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है.
लगभग 50 लाख रुपये की राशि से सड़क का हुआ था निर्माण : चंदवा मोड़ से लेकर नयी पुलिस लाइन तक की सड़क को 50 लाख रुपये की राशि से निर्माण किया गया था. निर्माण के लगभग छह माह तक सड़क की स्थिति काफी अच्छी रही.
आवागमन सुचारु ढंग से होते रहा पर छह माह के बाद सड़क का टूटना शुरू हो गया. इससे सड़क निर्माण की गुणवत्ता का पता चलता है. आज हालात ऐसी है कि सड़क तालाब बन कर रह गया है. जबकि मरम्मत के लिए 15 लाख की राशि का प्रावधान है. पर इस राशि का क्या हो रहा है, यह विभागीय अधिकारी ही बता पायेंगे.
सड़क की नहीं की जाती है निगरानी : सड़क की निगरानी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकार द्वारा नहीं किया जाता है. जबकि नियमानुसार लगातार सड़क की निगरानी की जानी है. पर विभागीय लापरवाही व राजमार्ग के अभियंताओं की मनमानी के कारण निगरानी नहीं हो पाती है. निगरानी नहीं होने से सड़क की स्थिति बदतर है.
उत्तर प्रदेश व बक्सर जिले से भी आते हैं वाहन : सड़क पर यातायात घनत्व काफी अधिक है. सड़क से प्रतिदिन जिला सहित बक्सर जिला व उत्तर प्रदेश के बलिया, गाजीपुर, वाराणसी सहित कई जिलों के वाहन गुजरते हुए पटना और छपरा की तरफ जाते हैं. इस कारण सड़क पर भारी दबाव बना रहता है. फिर भी इसकी मरम्मत नहीं होना चिंता का विषय है.
बोले प्रोजेक्ट मैनेजर
मामला संज्ञान में नहीं था. इसका निरीक्षण किया जायेगा. लोगों की सुविधा के लिए इसकी मरम्मत की जायेगी. हालांकि सड़क को बिहार सरकार को देने के लिए पत्र लिखा गया है. इसे बिहार सरकार को सौंपना है.
अजय ठाकुर, प्रोजेक्ट मैनेजर, राष्ट्रीय राजमार्ग

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