मॉनसून के देर से आने से किसानों में खेती को लेकर चिंता

आरा : खरीफ फसल के मौसम की शुरुआत हो चुकी है. रोहिणी नक्षत्र बीतने में महज दो दिन रह गया है. कई प्रखंडों व गांवों में किसान रोहिणी नक्षत्र में ही धान के बिचड़े भी लगा चुके हैं. पर जिस अनुपात में किसान बिचड़े लगाते हैं. उससे काफी कम मात्रा में बिचड़े लगाये गये हैं. […]

आरा : खरीफ फसल के मौसम की शुरुआत हो चुकी है. रोहिणी नक्षत्र बीतने में महज दो दिन रह गया है. कई प्रखंडों व गांवों में किसान रोहिणी नक्षत्र में ही धान के बिचड़े भी लगा चुके हैं. पर जिस अनुपात में किसान बिचड़े लगाते हैं. उससे काफी कम मात्रा में बिचड़े लगाये गये हैं. इससे किसानों को काफी परेशानी हो रही है. भीषण गर्मी व नहरों में पानी नहीं आने से किसान निजी संसाधनों पर ही निर्भर हैं.

पंपसेट से पानी निकालकर बिचड़ा लगाने में काफी खर्च हो रहा है, जिसे सभी किसान वहन नहीं कर पा रहे हैं. देर से बिचड़ा डालने पर उत्पादन पर बुरा असर पड़ेगा. कम उत्पादन होने से किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार की योजना सफल नहीं हो पायेगी. इसे किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें उभर गयी हैं. जबकि भोजपुर जिले का दक्षिण इलाका धान के कटोरे के रूप में जाना जाता है.
तपती गर्मी से जल स्तर नीचे जाने से है परेशानी : पिछले तीन माह से जिले में पड़ रही तपती गर्मी से पानी का जल स्तर लगातार नीचे चला गया है. आग उगलती सूरज की किरणों के कारण जिले में पानी का जल स्तर 15 से 20 फुट तक नीचे गया है.
पर इसे रोकने को लेकर कोई उपाय नहीं किया जा रहा है. रेन वाटर हार्वेस्टिंग योजना जिले में मजाक बनकर रह गयी है. इस कारण कृषि कार्य में भी काफी परेशानी हो रही है. किसानों के ओपेन बोरिंग सूख गये हैं. बोरिंग सूखने से बिचड़ा डालना संभव नहीं हो पा रहा है. इसे लेकर किसानों में मायूसी का माहौल है.
नहर में अभी तक नहीं आया पानी : किसानों की सुविधा को देखते हुए सरकार रोहिणी नक्षत्र के पहले नहरों में पानी उपलब्ध कराती थी. पर इस वर्ष रोहिणी नक्षत्र की समाप्ति पर भी अभी तक पानी नहीं आया है. सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता रत्नेश कुमार ने बताया कि 15 जून तक नहर में पानी आने की संभावना है. जब ऊपर से पानी मिलेगा कभी पानी देना संभव हो पायेगा.
बोरिंग से सिंचाई में हो रहा है काफी खर्च
नहर में पानी नहीं आने के कारण किसानों को बोरिंग से खेतों में पानी करना पड़ रहा है. हालांकि कई किसान किसी तरह बोरिंग से बिछड़े लगा रहे हैं .पर महंगा होने के कारण उन्हें काफी परेशानी हो रही है. वहीं कई किसान महंगे डीजल से पानी निकाल कर बिचड़ा डालने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं. इस कारण कृषि कार्य काफी प्रभावित हो रहा है. पानी के अभाव में रोपे गये बिछड़े भी सूख रहे हैं.
एक लाख 20 हजार हेक्टेयर में धान की रोपनी का है लक्ष्य : खरीफ
फसल के तहत जिले में एक लाख 20 हजार हेक्टेयर धान की रोपनी का लक्ष्य विभाग द्वारा निर्धारित किया गया है. इसके साथ 5000 हेक्टेयर में मक्के की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. ताकि किसानों का जीवन स्तर सुधर सके. पर पानी नहीं मिलने से किसानों के सामने समस्याएं मुंह बाये खड़ी हैं.

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