पंडित रामानंद तिवारी की पुण्यतिथि कल, पंडित रामानंद तिवारी का व्यक्तित्व और संघर्ष प्रेरणा का स्रोत

बिहिया : सामाजिक न्याय के झंडा को बुलंद कर परिवर्तन की अंगड़ाई लानेवाले समाजवादी नेता पंडित रामानंद तिवारी की 40वीं पुण्यतिथि पांच अप्रैल शुक्रवार को है. 1942 की अगस्त क्रांति के बिहारी नायक, कुशल राजनेता और लोकप्रिय जनप्रतिनिधि रह चूके पंडित रामानंद तिवारी का व्यक्तित्व और संघर्ष गाथा प्रेरणा का स्त्रोत है. गरीबाें, दलितों व […]

बिहिया : सामाजिक न्याय के झंडा को बुलंद कर परिवर्तन की अंगड़ाई लानेवाले समाजवादी नेता पंडित रामानंद तिवारी की 40वीं पुण्यतिथि पांच अप्रैल शुक्रवार को है. 1942 की अगस्त क्रांति के बिहारी नायक, कुशल राजनेता और लोकप्रिय जनप्रतिनिधि रह चूके पंडित रामानंद तिवारी का व्यक्तित्व और संघर्ष गाथा प्रेरणा का स्त्रोत है.

गरीबाें, दलितों व पिछड़ों की सेवा कर उनके हक व मान-सम्मान की जंग लड़नेवाले और भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद करनेवाले रामानंद तिवारी का मूल्य व आदर्श ही सिंबल था.
भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड के रमडिहरा गांव में 1906 में जन्में रामानंद का बचपन अभाव और मुश्किलों में बीता लेकिन कहते हैं कुछ लोग अपने लिए धरती पर आते हैं तथा कुछ लोग समाज के लिए. कुछ ऐसे ही व्यक्ति थे रामानंद तिवारी जो समाज के लिए ही जीते थे.
रामानंद तिवारी का जन्म बंग भंग आंदोलन की गोद में बिहार व देश की तकदीर व तस्वीर सजाने के लिए हुआ. जीविकोपार्जन के लिए बचपन में ही वे घर छोड़कर रसोइया का काम करने लगे. उसके बाद उन्होंने रेलवे स्टेशन पर पानी भी पिलाया और अखबार भी बेचने का काम किये.
इसी दौरान वे पुलिस में भर्ती हो गये, जहां से उनके जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ. अंग्रेजी हुकूमत में पुलिस की नौकरी करने के बाद भी राष्ट्रहित में कार्य करते रहे, जिससे कई बार उन्हें अंग्रेजों का कोपभाजन बनना पड़ा.
सन् 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ों आंदोलन के समय उन्होंने सैकड़ों सिपाहियों के साथ बगावत कर दिया, जिसके लिए उन्हें जेल जाना पड़ा और चार साल बाद जेल से रिहा हुए. तत्पश्चात वे पुलिस मेंस एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे.
आजादी मिलने के बाद वे 1952 में सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर पहली बार अपने गृह क्षेत्र शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से विजयी हुए और 1971 तक उस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे.
इस दौरान वे दो बार बिहार के गृहमंत्री भी बने. 1977 में वे बक्सर लोकसभा से सांसद भी चुने गये. कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद रामानंद तिवारी एक कुशल राजनेता और मुखर वक्ता थे. अपने जीवन का लगभग 18 वर्ष उन्होंने जेलों में बिताया.
तिवारी जी का कहना था कि दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है, बस व्यक्ति में लगन और संकल्प होना चाहिए. ऐसे आदर्श पुरुष रामानंद तिवारी को अब बिहार और बिहार के लोग भूल रहे हैं. क्योंकि उनकी पुण्यतिथि पर भी उनके गृह क्षेत्र में उन्हें याद करने के लिए कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं है.

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