आंदोलन की घोषणा के बाद भी नहीं पहुंचे क्षेत्र के सांसद, विधायक व जनप्रतिनिधि
आरा/अगिआंव : पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर तले किसानों ने गुरुवार को अनिश्चितकालीन सड़क जाम कर दिया. सड़क जाम कर रहे लोग नहर के अंतिम छोड़ तक पानी सहित खेती से संबंधित कई मुद्दों को आधार बनाते हुए जिला प्रशासन से मांग कर रहे थे. गुरुवार को पारंपरिक हथियारों से लैस सैकड़ों किसान सड़क पर उतर गये और नारेबाजी व प्रदर्शन करने लगे. इस दौरान दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गयी. जाम लगने के कारण दोनों तरफ लगभग 10 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गयी, इस कारण पूरी तरह से आवागमन बाधित हो गया. घटना की जानकारी मिलते ही नहर विभाग के एसडीओ, अगिआंव बीडीओ, थानाध्यक्ष नारायणपुर मौके पर पहुंच गये और आक्रोशित किसानों को समझाने बुझाने लगे.
हालांकि वार्ता विफल रही. जाम यथावत लगा हुआ है. आक्रोशित किसान नारायणपुर नहर को डिलियां लख से जोड़ने, सेवथा नहर, पवार लाइन में पिछले 20 वर्षों से पानी नहीं, पवार लाइन से छपरापुर, बनौली, मेहंदीचक, नारायणपुर के खेतों की सिचाईं होती थी जिसमें 20 साल से पानी नहीं आ रहा है, जिससे कई बिगहा खेत परती ही रह जाता है. सेवथा और बरुणा नहर में 22 साल से पानी नहीं आ रहा है. सरकार नहरों का निजीकरण करने की साजिश कर रही है. नहरों की उड़ाही होती तो मजदूरों को काम मिलता और खेतों को पानी जिससे पैदावार भी बढ़ता सहित कई मुद्दों को लेकर आज आरा-अरवल मुख्य सड़क को नारायणपुर के पास जाम कर दिया. बता दें कि किसान एक तो मौसम के बेरुखी से परेशान हैं और दूसरी तरफ सरकार नहरों में पानी नहीं देकर किसानों के समस्याओं को और बढ़ा रही है. सैकड़ों की संख्या में किसान अपने हाथों में लाल झंडा व पारंपरिक हथियार लिए अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगा रहे थे. किसान बीच सड़क पर ही टेंट व कुर्सी बेंच लगा कर सड़क को जाम कर दिया.
लोगों ने सभा को संबोधित करते हुए आंदोलन की दी चेतावनी
कई नहरों में नहीं है पानी, किसानों को हो रही परेशानी,सूख रहे बिचड़े
दक्षिणी क्षेत्र में हैं कई नहरें
जिले के दक्षिणी क्षेत्र में सिंचाई के संसाधन के रूप में सरकार ने नहरें उपलब्ध करायी है. अभी कृषि कार्य का सर्वोत्तम समय है. किसानों ने बिचड़ा लगा दिया है. वहीं कई प्रखंडों में धान की रोपनी धीरे-धीरे शुरू हो गयी है. जहां अभी रोपनी शुरू नहीं हुई है, वहां के किसानों को बिचड़ा के लिए पानी की आवश्यकता है. वहीं जहां रोपनी शुरू हुई है, वहां धान की रोपनी करने को लेकर खेत को तैयार करने के लिए पानी की आवश्यकता है. पर पानी नहीं मिल रहा है है.
