उदासीनता . अस्पताल से लापता रहते हैं डॉक्टर, खाली रहती हैं कुर्सियां
आरा : एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का दावा कर रही है. इसके लिए कई तरह के संसाधनों को भी उपलब्ध कराया जा रहा है, पर सरकार के स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी के योजना को चिकित्सकों द्वारा ही सरकार के मंसूबों पर पानी फेरा जा रहा है. लापरवाह चिकित्सकों के कारण मरीजों की जान पर खतरा बना रहता है. सदर अस्पताल का हालात यह है कि 8.40 बजे तक चिकित्सकों की कई कुर्सियां खाली थीं. चिकित्सक गायब थे. अस्पताल के कई विभागों की यही स्थिति थी. ओपीडी में सुबह आठ बजे से ही मरीजों का निबंधन शुरू हो जाता है, पर निबंधन के बाद मरीजों को काफी समय तक चिकित्सकों के लिए इंतजार करना पड़ता है. इस दौरान गंभीर रूप से बीमार मरीजों की जान पर खतरा बना रहता है.
सुबह 8.40 तक नहीं पहुंचे थे चिकित्सक: सदर अस्पताल की कुव्यवस्था का आलम यह है कि सुबह 8.40 बजे तक ओपीडी में डॉक्टर नहीं पहुंचे थे. विभागों की कुर्सियां खाली पड़ी थीं. मरीज ओपीडी में निबंधन के बाद डॉक्टरों से दिखाने के लिए इधर-उधर से भटक रहे थे. इससे उन्हें काफी परेशानी हो रही थी. अस्पताल के हड्डी विभाग, मेडिसीन विभाग, प्रसूति विभाग, सर्जिकल विभाग सहित अन्य विभागों में भी कोई चिकित्सक नहीं पहुंचा था. जबकि काफी संख्या में मरीजों का निबंधन हो चुका था.
अक्सर बंद रहता है आईसीयू
सदर अस्पताल का आईसीयू अक्सर बंद रहता है. इससे गंभीर रूप से बीमार मरीजों को कई तरह की परेशानी होती है. ऐसे मरीजों को मजबूरी में विकल्प के रूप में निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है. जहां उनका इलाज काफी महंगी दर पर होता है. इससे मरीजों को काफी आर्थिक क्षति होती है. इतना ही नहीं, गरीब मरीज महंगे इलाज कराने में असमर्थ होते हैं. इस हालत में ऐसे मरीजों को कोई विकल्प नहीं बचता है. जबकि सरकार का दावा मरीजों को सस्ती व सुविधाजनक स्वास्थ्य सुविधा देने की है.
क्या कहते हैं सिविल सर्जन
इस तरह की जानकारी नहीं है. संज्ञान में आने पर इसकी जांच की जायेगी तथा दोषी चिकित्सकों पर कार्रवाई की जायेगी.
डॉ सतीश कुमार सिन्हा, प्रभारी सिविल सर्जन
