सुविधाओं के दिखाये गये सब्जबाग, टूट गये मरीजों के सपने

आरा : सरकार द्वारा काफी तामझाम से सदर अस्पताल में मरीजों की सुविधाओं के लिए सब्जबाग दिखाये गये, पर पांच माह बाद भी इस दिशा में किसी तरह की पहल नहीं की गयी. इस कारण मरीजों को सुविधाओं के सपने टूटने लगे हैं. सदर अस्पताल का विगत 25 जून को निरीक्षण कर कई तरह की […]

आरा : सरकार द्वारा काफी तामझाम से सदर अस्पताल में मरीजों की सुविधाओं के लिए सब्जबाग दिखाये गये, पर पांच माह बाद भी इस दिशा में किसी तरह की पहल नहीं की गयी. इस कारण मरीजों को सुविधाओं के सपने टूटने लगे हैं. सदर अस्पताल का विगत 25 जून को निरीक्षण कर कई तरह की योजनाओं के बारे में खाका तैयार करने की बात की गयी. वहीं डीपीआर तैयार कर योजनाओं को शुरू करने के लिए निर्णय लिया गया. इसके तहत सदर अस्पताल का पुनर्निर्माण कर मेडिकल कॉलेज की तरह सुविधाओं से लैस करने का निर्णय लिया गया.

इसके लिए नेशनल हेल्थ सिस्टम रिसोर्स सेंटर के बिहार हेड अजीत सिंह के नेतृत्व में मेडिकल एक्सपर्ट की टीम ने सदर अस्पताल के परिसर व सभी वार्डों का निरीक्षण किया, पर अब तक उपलब्धि टांय-टांय फिस ही है.

10 करोड़ की लागत से करनी थी शुरुआत : सदर अस्पताल का मेडिकल कॉलेज स्तर में लाने के लिए 10 करोड़ की लागत से निर्माण कार्य शुरू किया जाना था. इसके तहत सुविधाओं से लैस भवन निर्माण करने की योजना थी, पर अब तक किसी भी स्तर पर कार्रवाई होते नहीं दिख रही है. मरीजों व जिलावासियों के सपने चूर-चूर हो रहे हैं.
100 बेडों का बनाया जाना था आधुनिकतम अस्पताल : सदर अस्पताल परिसर में पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर खाली करायी गयी जमीन पर मरीजों की सुविधा के लिए 100 बेडवाला आधुनिकतम सुविधाओं से लैस अस्पताल बनाने की योजना थी, ताकि मरीजों को इसका लाभ मिल सके. जिले के मरीजों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़े तथा अधिक खर्च से भी बच सकें.
डॉक्टर्स व स्टाफ के लिए क्वार्टर बनाने की थी योजना : सदर अस्पताल में डॉक्टर्स व सभी स्टाफ के लिए क्वार्टर बनाने की योजना थी, ताकि डॉक्टर व स्टाफ को सुविधा हो सके. वहीं किसी भी परिस्थिति के लिए मरीजों को डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ के लिए परेशान नहीं होना पड़े. परिसर में ही क्वार्टर रहने से डॉक्टर व स्टाफ सुगमता से उपलब्ध हो सके.
एसी लगाने का लिया गया था निर्णय : सदर अस्पताल में मेडिकल कॉलेज के स्तर की सुविधाओं के समकक्ष लाने के लिए सभी वार्डों में एसी लगाने की योजना थी, ताकि मरीजों को सुविधा हो सके. मेडिकल साइंस के अनुसार कई बीमारियों में मरीजों को सफाई व एसी की आवश्यकता होती है, ताकि किसी तरह का संक्रमण नहीं हो सके.
नये कलेवर में सभी वार्डों को तैयार करने का लिया गया था निर्णय : सदर अस्पताल के सभी वार्डों को नये कलेवर में तैयार करने के लिए वार्डों का स्टेट हेड अजीत सिंह के नेतृत्व में टीम ने निरीक्षण किया था़ उस पर योजना अस्पताल के अधिकारियों के साथ मिलकर तैयार की गयी थी, पर अब तक इस पर किसी तरह की कार्रवाई होते दिखाई नहीं दे रहे हैं.
नौ अस्पतालों में सदर अस्पताल का हुआ था चयन : मेडिकल कॉलेज स्तर पर अपग्रेड करने के लिए सरकार द्वारा प्रदेश में नौ सदर अस्पतालों का चयन किया गया था. इसमें आरा सदर अस्पताल भी शामिल है़ पांच माह गुजर गये. अस्पताल प्रशासन व सरकार द्वारा इस दिशा में प्रगति शून्य है.
तीन एयर कंडीशन ऑपरेशन थियेटर बनाने का लिया गया था निर्णय
नेशनल हेल्थ सिस्टम रिसोर्स सेंटर के अधिकारियों द्वारा लेबर रूम के ऊपर तीन वातानुकूलित ऑपरेशन थियेटर बनाने का निर्णय लिया गया था, ताकि मरीजों को सुविधा हो सके. वर्तमान में महज एक ऑपरेशन थियेटर है. उसमें भी सुविधाओं की काफी कमी है. इससे मरीजों सहित चिकित्सकों को भी ऑपरेशन के समय काफी
परेशानी होती है.
मेडिकल कॉलेज में अपग्रेड करने का हुआ था निर्णय
सदर अस्पताल को भविष्य में मेडिकल कॉलेज में अपग्रेड करने का निर्णय लिया गया था. इसके लिए डीपीएम प्रेम रंजन मोदी तथा अस्पताल उपाधीक्षक सतीश प्रसाद सिन्हा को डीपीआर तैयार कराने की जिम्मेदारी दी गयी थी, पर अब तक डीपीआर भी तैयार नहीं किया गया है. लापरवाही का आलम यह है कि सरकार द्वारा सुविधाओं की बात की जाती है, पर वह धरातल पर नहीं उतारी जाती है.

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