21वीं सदी में भी कुहरे से निबटने के लिए रेलवे के पास नहीं है पुख्ता इंतजाम
समय से रैक नहीं मिलने की वजह से लगातार ट्रेनों को किया जा रहा रद्द
आरा : पटना-मुगलसराय रेलखंड से होकर चलनेवाली ट्रेनों की चाल कुहरे से पहले ही पटरी से उतर गयी है. देश की प्रमुख शहरों से आनेवाली ट्रेन को रैक के अभाव में लगातार रद्द किया जा रहा है. सोमवार को अप व डाउन की महानंदा, डाउन कोटा-पटना व फरक्का एक्सप्रेस रद्द रही. इसके अलावे गरीब रथ, तूफान, विभूति सहित करीब 28 ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 01 से 15 घंटे तक लेट चल रही थी. ट्रेनों के लगातार रद्द होने की वजह से यात्रियों को भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है. हालांकि रेलवे बोर्ड इस साल कुछ नये उपकरणों के साथ कोहरे से जंग करने की तैयारी में जुटा हुआ है.
कुहासे में ट्रेन संचालन में होनेवाली परेशानियां : ठंड के मौसम में आरा समेत समूचे उत्तर व मध्य भारत में घना होकर पड़ता है. इसके कारण रेल यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो जाती है. कुहासे में दृश्यता काफी कम हो जाती है, जिसकी वजह से ट्रेनें अपने निश्चित समय से घंटों देर से पहुंचती है. ड्राइवरों द्वारा बिगड़ा दृश्यता और सतर्क ड्राइविंग के कारण धूमिल मौसम सभी ट्रेनों की गतिशीलता और गति को कम कर दी जाती. कम स्पीड के कारण, ट्रेनें अपने गंतव्य स्थानों तक देर से पहुंचती है और अधिक देर हो जाने की वजह से वापसी भी देर हो जाती है. ऐसे में रैक के अभाव में उसे रद्द करना पड़ता है.
रेलवे द्वारा कुहासे से निबटने के लिए की जा रहीं तैयारियां
ट्रेनों की स्पीड से ज्यादा संरक्षा व सुरक्षा पर ध्यान
जीपीएस युक्त फाग सेफ डिवाइस
ट्रैक पर डेटोनेटर
फॉगमैन की तैनाती
सिगनल ग्लास से धूल की सफाई
अतिरिक्त रैक की व्यवस्था
ड्राइवर को सिग्नल इंडिकेशन बुकलेट
क्या कहते हैं अधिकारी
ट्रेनों के लेट चलने के कई कारण हैं. समय से रैक नहीं पहुंचने की वजह से भी ट्रेनें रद्द की जा रही है. यात्रियों को परेशानी न हो इस पर रेलवे द्वारा विशेष ध्यान दिया जाता है.
संजय प्रसाद, पीआरओ, दानापुर डिवीजन
