उदवंतनगर : गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने और शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर इंतजाम किये जाने का दावा सरकार करती है. बावजूद इसके सरकारी विद्यालयों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पाया है. सरकार के दावों की पोल सरकारी विद्यालयों में खुल जाती है. ऐसा इसलिए कि विद्यालयों में संसाधन का भी अभाव है. ग्रामीण इलाकों में तो स्थिति और बदतर है. आरा मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर उदवंतनगर प्रखंड के कसाप स्थित उत्क्रमित कन्या मध्य विद्यालय में जब प्रभात खबर की टीम शिक्षा से छल अभियान के तहत पहुंची, तो यहां कई चौंकानेवाले बातें सामने आयीं. जिस विद्यालय में छात्राओं की संख्या अधिक हो और वहां शौचालय में ताला बंद हो, तो समझा जा सकता है कि छात्राओं को क्या परेशानी होती होगी. यहीं नहीं, विद्यालय के परिसर में बारिश के कारण कहीं-कहीं जलजमाव तो कहीं कीचड़ का भी नजारा दिखा.
छात्र-छात्राओं के पेयजल के लिए चापाकल तो है, लेकिन वहां भी घास-पत्ती जमी हुई थी. कक्षा में भी नामांकित छात्राओं की तुलना में उपस्थिति आधा थी. हालांकि छात्राओं के लिए बेंच-कुरसी उपलब्ध है. जबकि कमरों की संख्या 13 है, लेकिन इसमें चार कमरों में बारिश का पानी टपकता दिखा. कई कमरों की छत जर्जर है. मैदान में जलजमाव के कारण छात्र-छात्राएं खेल का भी आनंद नहीं उठा पाते हैं.
सरकार से नहीं मिली है पुस्तक : अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को अभी तक सरकार द्वारा पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध नहीं करायी गयी है. इससे भी पठन-पाठन में परेशानियां हो रही हैं. अधिकतर छात्र बिना पुस्तक के ही विद्यालय आते हैं.
