सुलतानगंज-मुंगेर सीमा घोरघट में हजरत निर्घिन साह व हजरत सत्तार साह बाबा का सालाना दो दिवसीय उर्स सोमवार शाम चादरपोशी के साथ शुरू हो गया. अकीदतमंदों की मौजूदगी में चादर को पूरे इलाके में घुमाया गया, जिससे माहौल पूरी तरह रूहानी हो उठा. घोरघट का यह उर्स सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था का जीवंत प्रतीक है.जहां हर दिल झुकता है और हर दुआ कबूल होने की उम्मीद लेकर उठती है. उर्स के पहले दिन घोरघट क्षेत्र के दस मजार शरीफ पर चादरपोशी की गयी. भागलपुर से मुंगेर जिले के बरियारपुर तक चादर घुमाते हुए श्रद्धालुओं ने हर मजार पर फूल-फातिहा पेश की. चादरपोशी के बाद देर रात तक जलसा हुआ, जिसमें दूर-दराज से पहुंचे बड़े-बड़े आलिम और उलेमा ने भाग लिया.
‘मगफिरत’ की मांगी दुआ, गुनाहों की माफी में झुके सिर
उर्स पर अकीदतमंद मजार पर पहुंचकर अपने गुनाहों की माफी (मगफिरत) की दुआ मांगी. लोगों का मानना है कि बाबा के दरबार में सच्चे दिल से मांगी गयी हर मुराद जरूर पूरी होती है. यही वजह है कि दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं और आस्था के साथ नतमस्तक होते हैं. हजरत अब्दुल सत्तार साह की दरगाह करीब 1200 वर्ष पुरानी है. यहां से गुजरने वाले लोग अपने वाहन को रोक कर बाबा को सलाम करते हैं और फिर आगे बढ़ते हैं. मंत्री से लेकर संतरी तक हर कोई बाबा के मजार पर सिर झुकाता है. .
