भागलपुर: गंगा की धारा समझने में फेल हुए जल संसाधन विभाग के इंजीनियर! राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध टूटने से बहे करोड़ों

भागलपुर जिले में राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध का टूटना जल संसाधन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठा रहा है. बाढ़ निरोधात्मक कार्यों के नाम पर खर्च हुए करोड़ों रुपये गंगा में समा गए, जिससे हजारों ग्रामीण विस्थापन के कगार पर हैं. ग्रामीणों ने इंजीनियरों और ठेकेदारों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं.

भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत खरीक अंचल में राघोपुर-काजीकोरैया मार्जिनल तटबंध के अचानक टूट जाने से जल संसाधन विभाग के अभियंताओं की तकनीकी समझ, गुणवत्ता और कार्यशैली एक बार फिर कटघरे में खड़ी हो गई है. बाढ़ निरोधात्मक कार्यों के नाम पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये पलभर में गंगा की उग्र धारा में समा गए. तटबंध टूटने के बाद राघोपुर के आधा दर्जन से अधिक टोलों में तेजी से बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है, जिससे हजारों ग्रामीणों के सामने घर-बार छोड़कर पलायन करने और विस्थापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है.

गंगा की धारा समझने में फेल, परंपरागत ढर्रे पर चल रहा काम

इलाके के लोग पिछले एक दशक से हर साल बाढ़ और कटाव का दंश झेल रहे हैं, लेकिन विभाग अब तक कोई ठोस व स्थायी समाधान नहीं निकाल पाया:

  • लगातार ध्वस्त हो रहे तटबंध: अगस्त 2024 में इस्माईलपुर-बिंदटोली तटबंध के भीतर ही भीतर कटाव (Under-mining) से टूटने पर करोड़ों रुपये खर्च हुए थे. इसके बाद 2025 में स्पर संख्या 7-8 और 8-9 के बीच तटबंध टूटा और अब 2026 में राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध भी धराशायी हो गया.
  • वैज्ञानिक अध्ययन का अभाव: ग्रामीणों का कहना है कि जब तक गंगा की धारा का आधुनिक और वैज्ञानिक अध्ययन कर स्थायी समाधान नहीं खोजा जाएगा, तब तक परंपरागत बोरियों और जियोबैग के सहारे बर्बादी का यह सिलसिला नहीं थमेगा.

ग्रामीणों में भारी आक्रोश: 'कटाव निरोधी कार्य बन गया है ATM'

तटबंध टूटने से बेघर हुए ग्रामीणों में प्रशासनिक और विभागीय लापरवाही को लेकर जबरदस्त उबाल है:

  • फायदे के लिए बाढ़ का इंतजार: स्थानीय ग्रामीण धनेश्वर मंडल व अन्य ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इंजीनियरों और ठेकेदारों को बाढ़ का इंतजार रहता है, ताकि आपातकालीन फ्लड फाइटिंग के नाम पर बिना किसी ठोस गुणवत्ता के सरकारी राशि का बंदरबांट किया जा सके.
  • आंसुओं पर राजनीति: ग्रामीणों का कहना है कि हर साल उनके घर, खेत और भविष्य पानी में डूब जाते हैं, लेकिन विभाग बाढ़ खत्म होते ही फाइलों को बंद कर देता है.

5 करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी के बावजूद नहीं बच सका तटबंध

जनवरी 2026 में ही इस तटबंध की सुरक्षा और कटावरोधी कार्य के लिए करीब 5 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी:

  • नदी का दबाव और गाद (टीला): डीएम अलंकृता पांडेय के अनुसार, बांध के दूसरी ओर नदी के बीच शोल (टीला) बन जाने से गंगा की सीधी धारा राघोपुर तटबंध पर सीधा दबाव बना रही थी. जलस्तर अत्यधिक बढ़ने से तटबंध यह दबाव नहीं झेल सका.
  • विपक्ष ने उठाए सवाल: राजद के प्रदेश प्रवक्ता अरुण यादव ने इसे विभागीय लापरवाही का बड़ा प्रमाण बताते हुए कहा कि जब धारा का दबाव और खतरे के संकेत पहले से साफ दिख रहे थे, तो समय रहते तटबंध को मजबूत क्यों नहीं किया गया?

जवाबदेही तय करने का समय

राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध का टूटना केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि निगरानी, योजना और गुणवत्ता की विफलता है. जब जनवरी में करोड़ों रुपये स्वीकृत हो चुके थे, तो गुणवत्तापूर्ण काम क्यों नहीं हुआ? यह सवाल अब पूरे इलाके में गूंज रहा है.


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By Vipin Thakur

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