Bhagalpur news मुरारका कॉलेज का स्थापना दिवस आज

उच्च शिक्षा की अलख जगाने वाला मुरारका कॉलेज सोमवार को अपना 72 वां स्थापना दिवस मना रहा है.

उच्च शिक्षा की अलख जगाने वाला मुरारका कॉलेज सोमवार को अपना 72 वां स्थापना दिवस मना रहा है. इसे टीएमबीयू के 12 अंगीभूत महाविद्यालयों में नैक मूल्यांकित कॉलेज होने का गौरव प्राप्त है. यह संस्थान आज भी पीजी की पढ़ाई के लिए संघर्षरत है. मुरारका कॉलेज से पढ़े छात्र आज प्रशासनिक सेवा, शिक्षा, राजनीति और अन्य उच्च पदों पर अपनी पहचान बना चुके हैं. विज्ञान और कला संकाय के साथ अब कॉमर्स की पढ़ाई शुरू हो गयी है. एनसीसी व एनएसएस की गौरवशाली परंपरा ने कॉलेज को विशिष्ट पहचान दी. वर्तमान पीढ़ी के छात्र स्नातकोत्तर शिक्षा के लिए भागलपुर जैसे शहरों की ओर पलायन को मजबूर हैं.

शिक्षकों और कर्मियों की कमी बनी बड़ी चुनौती

कॉलेज में कई विषय अतिथि शिक्षकों के सहारे संचालित हो रहे हैं. तृतीय व चतुर्थ वर्गीय कर्मियों की भारी कमी से शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है. विधायक प्रो ललित नारायण मंडल ने विधानसभा में कॉलेज से जुड़े मुद्दों को उठाया है. विधायक ने कहा कि कॉलेज के विकास व उच्च शिक्षा को लेकर सीएम नीतीश कुमार से मिल कर प्रयास जारी रहेगा. प्राचार्य डॉ नागेंद्र तिवारी ने कहा कि मुरारका कॉलेज में हर हाल में पीजी की पढ़ाई शुरू होनी चाहिए. हर स्तर से प्रयास तेज किये जायेंगे. बीए की छात्रा का कहना है कि यदि कॉलेज में पीजी की पढ़ाई शुरू होती है, तो ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों को उच्च शिक्षा लाभ मिलेगा.

मुरारका महाविद्यालय में रिटायर्ड शिक्षक व कर्मी होंगे सम्मानित

सुलतानगंज मुरारका महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ नागेंद्र तिवारी ने बताया कि इस वर्ष स्थापना दिवस पर महाविद्यालय के शिक्षक व कर्मियों के अलावा कॉलेज के एक छात्र को भी सम्मानित किया जायेगा. यह परंपरा इस वर्ष से शुरू की जा रही है. एक दर्जन सेवानिवृत्त शिक्षकों व कर्मियों से संपर्क कर उन्हें कार्यक्रम की जानकारी दी गयी है. स्थापना दिवस समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम सहित कई अन्य कार्यक्रम प्रस्तावित हैं. कॉलेज प्रशासन के अनुसार स्थापना दिवस को लेकर उत्साह का माहौल है. कार्यक्रम की तैयारी पूरी कर ली गयी है.

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By JITENDRA TOMAR

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bhagalpur news. प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे व साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो - लोकभवन ने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने दिया निर्देश- लोकभवन ने पत्र में कहा, निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायेवरीय संवाददाता, भागलपुरपीजी व कॉलेज में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो. इसे लेकर लोकभवन के विशेष कार्य अधिकारी न्यायिक कल्पना श्रीवास्तव ने टीएमबीयू सहित सूबे के अन्य विश्वविद्यालयों में पत्र भेजा है. पत्र में विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार को लेकर सचिवालय ने विवि प्रशासन को सख्त रुख अपनाने के लिए कहा है. शिक्षकों के कार्यभार को लेकर जारी निर्देश में स्पष्ट कहा कि निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायी जाये.लोकभवन से जारी पत्र में कहा कि पूर्णकालिक कार्यरत सभी शिक्षकों को सेमेस्टर के दौरान प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो.शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह लागू रहेगापत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि न्यूनतम कार्यभार एक शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह यानी 180 कार्य दिवसों तक लागू रहेगा. साप्ताहिक 40 घंटे के कार्यभार को छह कार्य दिवसों में समान रूप से विभाजित करने का निर्देश दिया है. कहा कि यूजीसी के प्रावधानों में भी कार्यभार से संबंधित इसी तरह के मानदंड निर्धारित हैं. जिन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त है. उनका पालन अनिवार्य है. उन मानकों को सख्ती से लागू कर बेहतर शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित करें.लोकभवन को मिली शिक्षकों के गायब रहने की शिकायतलोकभवन को शिक्षकों के गायब रहने की शिकायत मिल रही है. अंदरखाने की मानें, तो कुछ छात्र संगठन व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कॉलेज व पीजी विभागों में निर्धारित समय से पहले ही गायब रहने की शिकायत लोकभवन से की है. इसे लेकर कुलाधिपति सख्त होते दिख रहे है. ऐसे में कॉलेजों व पीजी विभाग का औचक निरीक्षण भी किया जा सकता है.ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी की नहीं होती है क्लासकॉलेज में ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी विषय की क्लास नहीं होती है. एक दिन पहले छात्र राजद के कार्यकर्ताओं ने एक कॉलेज के प्राचार्य से वार्ता के दौरान कहा था कि एमजेसी (ऑनर्स) विषय की क्लास होती है, लेकिन एमआइसी (सब्सिडियरी) विषय की क्लास नहीं होती है. छात्र संगठन का आरोप था कि एईसी, वीएसी व एसीसी की भी क्लास भी नहीं होती है.लोकभवन के निर्देश का हो रहा पालन - शिक्षक संगठनशिक्षक संगठन भुस्टा के महासचिव प्रो जगधर मंडल ले कहा कि लोकभवन के निर्देश का पालन हो रहा है. यूजीसी के नियमानुसार कॉलेज व पीजी विभागों में पांच घंटे तक शिक्षकों रहते हैं. सारा कार्य करते हैं. यह कोई नई बात नहीं है. शिक्षक लोकभवन के साथ है.

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