TMBU Pension Case: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय यानी टीएमबीयू में पेंशन एवं सेवानिवृत्ति लाभ से जुड़ा मामला गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है. विश्वविद्यालय की ओर से स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद एक सेवानिवृत्त कर्मचारी ने अपने लिखित जवाब में दावा किया है कि तीन लाख रुपये देने के पांच दिनों के अंदर उन्हें पेंशन एवं सेवानिवृत्ति लाभ मिल गया. कर्मचारी के इस दावे के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और पेंशन संचिका के निष्पादन को लेकर चर्चा तेज हो गयी है.
यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल एक ऑडियो से सामने आया था. ऑडियो में दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बीच सेवांत लाभ को लेकर बातचीत होने की बात सामने आयी थी. एक कर्मचारी ने विश्वविद्यालय में कार्यरत एक अधिकारी और एक कर्मचारी पर तीन लाख रुपये लेने का आरोप लगाया था. इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की थी. मामले में एक अधिकारी, एक कर्मचारी और दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था.
सेवानिवृत्त कर्मचारी ने अपने जवाब में क्या कहा
स्पष्टीकरण के जवाब में सेवानिवृत्त कर्मचारी ने दावा किया है कि 17 फरवरी 2025 को उन्होंने तीन लाख रुपये दिये थे. इसके पांच दिनों के अंदर कुलपति के आदेश से उन्हें पेंशन एवं सेवानिवृत्ति लाभ मिल गया.
कर्मचारी ने अपने जवाब में कहा है कि उन्होंने विश्वविद्यालय को जो जानकारी दी है, वह उनके अनुसार पूरी तरह सत्य है. उन्होंने यह भी कहा कि किसी को फंसाने के उद्देश्य से यह जानकारी नहीं दी गयी है. जवाब में उन्होंने 11 अगस्त 2026 को मोबाइल पर हुई बातचीत का भी उल्लेख किया है. कर्मचारी के अनुसार वह इलाज के सिलसिले में बाहर हैं.
28 फरवरी 2025 को हुए थे सेवानिवृत्त
सेवानिवृत्त कर्मचारी के अनुसार वह 28 फरवरी 2025 को विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हुए थे. उनका कहना है कि सेवानिवृत्ति से पहले ही पेंशन एवं सेवानिवृत्ति लाभ से संबंधित संचिका सभी आवश्यक अभिलेखों के साथ प्रस्तुत कर दी गयी थी.
इसके बाद उन्होंने पेंशन एवं अधीक्षण शाखा के प्रभारी से संचिका की स्थिति के संबंध में जानकारी ली. उन्होंने जांच कमेटी को बताया कि उनके एक रिश्तेदार गंभीर रूप से बीमार थे और इलाज के लिए तत्काल पैसे की जरूरत थी. आर्थिक जरूरत के बीच संचिका के निष्पादन को लेकर हुई बातचीत में उन्होंने एक कर्मचारी और एक अधिकारी पर तीन लाख रुपये देने का आरोप लगाया.
हालांकि, विश्वविद्यालय के संबंधित अधिकारी और कार्यरत कर्मचारी पहले ही पैसे के लेन-देन के आरोप को सिरे से खारिज कर चुके हैं. दोनों ने जांच कमेटी के समक्ष भी आरोप को निराधार और गलत बताया है. ऐसे में अब सेवानिवृत्त कर्मचारी के लिखित जवाब में तीन लाख रुपये देने के दावे के बाद जांच रिपोर्ट और विश्वविद्यालय के निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
तीन लाख रुपये के लेन-देन के आरोप की जांच पूरी
टीएमबीयू में पांच दिनों के अंदर पेंशन एवं सेवानिवृत्ति लाभ देने के एवज में तीन लाख रुपये के कथित लेन-देन के आरोप की जांच कमेटी पूरी कर चुकी है. बताया जा रहा है कि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप दी है.
अब इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन क्या निर्णय लेता है, इस पर सबकी नजर है. प्रभारी कुलपति से मामले में पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी.
TMBU Pension Case: अंडरटेकिंग लेकर पूरे वेतन भुगतान के आश्वासन पर महासंघ ने वापस ली हड़ताल
भागलपुर. टीएमबीयू में वेतन से अधिक भुगतान पाने वाले कर्मचारियों के वेतन में की गयी कटौती के मामले में अब पूर्व की तरह वेतन भुगतान करने का निर्णय लिया गया है. विश्वविद्यालय की ओर से संबंधित कर्मचारियों से अंडरटेकिंग लेने के बाद उन्हें पूर्व की भांति वेतन भुगतान किया जायेगा.
वेतन कटौती, प्रोन्नति सहित अन्य मुद्दों को लेकर कर्मचारी महासंघ ने हड़ताल पर जाने की चेतावनी देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को आवेदन दिया था. इसके बाद विश्वविद्यालय स्तर पर इस मामले में निर्णय लिया गया.
महासंघ के प्रक्षेत्रीय मंत्री सुशील मंडल ने कहा कि हड़ताल कार्यक्रम वापस ले लिया गया है. दूसरी ओर, इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय स्तर पर गठित नौ सदस्यीय जांच कमेटी ने भी कर्मचारियों के आंदोलन को टालने के लिए पूर्व की तरह वेतन भुगतान की अनुशंसा की थी.
कर्मचारियों का आरोप था कि बिना जांच के ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके वेतन में कटौती कर दी थी. नौ सदस्यीय कमेटी की दो बैठकों में सिंडिकेट सदस्य डॉ संजीव कुमार सिंह ने भी कहा था कि पहले सभी कर्मचारियों का पक्ष लिया जाना चाहिए.
विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि कर्मचारियों से अंडरटेकिंग लेने को लेकर अधिसूचना जारी की जायेगी.
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