तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के माध्यम से नियुक्त विभिन्न विषयों के शिक्षकों के लिए प्रशासनिक उदासीनता बड़ी मुसीबत बन गई है. बहाली के 7 साल बीत जाने और विश्वविद्यालय स्तर से प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद सिंडिकेट से अंतिम अनुमोदन (अप्रूवल) न मिलने के कारण शिक्षकों में आक्रोश चरम पर है.
रजिस्ट्रार से मिला शिष्टमंडल, गिनाईं प्रशासनिक कमियां
शनिवार को विवि के सीनेट सदस्य डॉ. आनंद शंकर, डॉ. विवेक सिंह, डॉ. अमित किशोर, डॉ. मुसर्रत हुसैन, डॉ. मनोज कुमार और डॉ. सुनील शाह के नेतृत्व में शिक्षकों का एक शिष्टमंडल रजिस्ट्रार प्रो. रामाशीष पूर्वे से मिला. शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2019 से ही विवि स्तर पर कागजी प्रक्रिया जरूर की गई, लेकिन सिंडिकेट की मुहर न लगने से पटना में उनका वेतन सत्यापन अटक गया है. पे-वेरिफिकेशन सेल ने अनिवार्य रूप से सिंडिकेट के अनुमोदन पत्र की मांग की है.
प्रमोशन मिला, लेकिन वेतन वृद्धि और वित्तीय लाभों पर लगी रोक
प्रशासनिक स्तर पर हो रही इस भारी देरी के कारण 60 से अधिक शिक्षकों को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है:
- वित्तीय नुकसान: वेतन सत्यापन (पे-वेरिफिकेशन) रुकने से शिक्षकों का वेतन नियमितीकरण, भविष्य में होने वाली वार्षिक वेतन वृद्धि (इन्क्रीमेंट) और अन्य सभी देय वित्तीय लाभ पूरी तरह रुक गए हैं.
- प्रमोशन पर असर: हालांकि इन शिक्षकों को विभाग द्वारा एकेडमिक लेवल 10 से लेवल 11 में प्रोन्नत (प्रमोशन) कर दिया गया है, लेकिन सेवा संपुष्टि के अभाव में वे इस प्रोन्नति का वास्तविक लाभ नहीं ले पा रहे हैं.
9 विषयों के 60 शिक्षकों में गहरा रहा रोष
विश्वविद्यालय के इस गतिरोध से कुल 9 विषयों के लगभग 60 शिक्षक सीधे तौर पर प्रभावित हैं और मानसिक व आर्थिक तनाव से गुजर रहे हैं. प्रभावित शिक्षकों में मुख्य रूप से:
- हिंदी व इतिहास
- समाजशास्त्र व राजनीति विज्ञान
- जूलॉजी व बॉटनी
- कॉमर्स, संस्कृत व उर्दू विषय के शिक्षक शामिल हैं.
जल्द बुलाई जाएगी सिंडिकेट की बैठक: रजिस्ट्रार
शिक्षकों की गंभीर समस्या और आक्रोश को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने का भरोसा दिया है:
"शिक्षकों की सेवा संपुष्टि और वेतन सत्यापन से जुड़ा यह मामला बेहद संवेदनशील है. विश्वविद्यालय इस मामले को पूरी गंभीरता से ले रहा है. मैं स्वयं प्रभारी कुलपति से विशेष अनुरोध कर इस विषय को आगामी सिंडिकेट की बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल कराऊंगा. सिंडिकेट से अंतिम अनुमोदन मिलते ही प्राथमिकता के तौर पर सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार कर पटना पे-वेरिफिकेशन सेल को भेज दिए जाएंगे, ताकि शिक्षकों के रुके हुए वित्तीय लाभ जल्द बहाल हो सकें." — प्रो. रामाशीष पूर्वे, रजिस्ट्रार, टीएमबीयू (TMBU)
