भागलपुर: TMBU के बायोटेक्नोलॉजी कर्मियों को बड़ा झटका, उच्च शिक्षा विभाग ने खारिज किया वेतन भुगतान और पदों की स्वीकृति का दावा

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के कर्मियों को बड़ा झटका लगा है. बिहार सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने वर्ष 2012-13 में भेजे गए तीन पदों की प्रशासनिक स्वीकृति और वेतन नियमितीकरण के प्रस्तावों को खारिज कर दिया है. यह फैसला पटना हाईकोर्ट के आदेश की समीक्षा के बाद लिया गया है.

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में काम कर रहे कर्मियों को गहरा झटका लगा है. बिहार सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष 2012 और 2013 में भेजे गए तीन पदों की प्रशासनिक स्वीकृति और कर्मियों के वेतन नियमितीकरण के प्रस्तावों को आधारहीन और नियम-विरुद्ध बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है. पटना उच्च न्यायालय द्वारा 20 जुलाई 2026 को दिए गए आदेश की गहन समीक्षा के बाद यह कड़ा फैसला लिया गया है. इस निर्णय के बाद अब कर्मियों के भविष्य और बकाया वेतन भुगतान का पूरा जिम्मा सीधे टीएमबीयू प्रशासन पर आ गया है.

उच्च शिक्षा विभाग ने क्यों खारिज किया दावा? ये हैं 4 प्रमुख कारण

उच्च शिक्षा विभाग ने टीएमबीयू के प्रस्तावों को नामंजूर करते हुए कई कड़े वैधानिक और तकनीकी तर्क दिए हैं:

  • पूर्णतः केंद्रीय योजना: भारत सरकार के विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय (जैव प्रौद्योगिकी विभाग) द्वारा 18 जनवरी 2005 को टीएमबीयू में बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन सिस्टम (BTIS) योजना के तहत यह केंद्र स्वीकृत किया गया था. यह योजना पूरी तरह से केंद्र प्रायोजित थी, इसमें राज्य सरकार कहीं से भी पक्षकार नहीं थी.
  • अधिनियम का उल्लंघन: बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 की धारा 35 के तहत यह स्पष्ट प्रावधान है कि राज्य सरकार की पूर्व लिखित मंजूरी और बजटीय आवंटन के बिना विश्वविद्यालय द्वारा सृजित कोई भी पद अवैध और शून्य माना जाता है. राज्य ने इन पदों के लिए कभी प्रशासनिक स्वीकृति नहीं दी.
  • 2020 में बंद हो चुकी है वित्तीय सहायता: केंद्र सरकार द्वारा इस योजना के लिए दी जाने वाली फंडिंग 31 मार्च 2020 को ही समाप्त कर दी गई थी. केंद्रीय योजना बंद होने के बाद संविदा या अस्थायी कर्मियों को नियमित करने का कोई वैधानिक अधिकार राज्य सरकार पर नहीं बनता.
  • विश्वविद्यालय की है सीधी जिम्मेदारी: उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. एनके अग्रवाल द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 2020 में योजना समाप्त होने के बाद भी कर्मियों को सेवा में बनाए रखने और उनके बकाया वेतन भुगतान का पूरा दायित्व केवल विश्वविद्यालय प्रशासन का है.

पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुई थी समीक्षा

यह पूरा मामला पटना उच्च न्यायालय में दायर याचिका (CWJC संख्या-17767/2019 : डॉ. राकेश रंजन व अन्य बनाम कुलाधिपति व अन्य) से जुड़ा है:

  • कोर्ट का निर्देश: हाईकोर्ट ने अपने 20 जुलाई 2026 के आदेश में उल्लेख किया था कि भारत सरकार द्वारा 43.60 लाख रुपये जारी करने के बावजूद पदों की प्रशासनिक स्वीकृति न मिलने से 2020 से कर्मियों का वेतन रुका हुआ है. कोर्ट ने उच्च शिक्षा निदेशक को इस पर जल्द निर्णय लेने का निर्देश दिया था.
  • विधिक संकट: सक्षम प्राधिकार के अनुमोदन के बाद 24 अगस्त 2026 को जारी इस विभागीय आदेश ने अब विश्वविद्यालय प्रशासन और याचिकाकर्ताओं के सामने एक बड़ा विधिक व आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है.

टीएमबीयू प्रशासन का रुख

इस बड़े फैसले के बाद टीएमबीयू के रजिस्ट्रार प्रो. रामाशीष पूर्वे ने स्पष्ट किया है कि, "पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देश विश्वविद्यालय को प्राप्त हो गया है. निर्देश के अनुसार नियमों का पूरी तरह से पालन किया जाएगा और आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी."


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By संजीव झा

संजीव कुमार झा प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >