तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में अब शोध गंगा पर थीसिस अपलोड करना जरूरी, इसके बाद ही मिलेगी पीएचडी उपाधि

अब शोधार्थियों को अपनी पीएचडी की डिग्री तब तक नहीं मिलेगी, जब तक उनका थीसिस ‘शोध गंगा’ पोर्टल पर सफलतापूर्वक अपलोड नहीं हो जाता.

भागलपुर से आरफीन जुबैर की रिपोर्ट :

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) प्रशासन ने पीएचडी डिग्री प्रदान करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है. अब शोधार्थियों को अपनी पीएचडी की डिग्री तब तक नहीं मिलेगी, जब तक उनका थीसिस ”शोध गंगा” (Shodhganga) पोर्टल पर सफलतापूर्वक अपलोड नहीं हो जाता. विवि के प्रभारी कुलपति प्रो विमलेंदु शेखर झा ने इस संबंध में विश्वविद्यालय के अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किये हैं.

थीसिस अपलोड न होने तक रिजल्ट नहीं होगा एप्रूव

विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक शोधार्थी का थीसिस शोध गंगा पर अपलोड नहीं हो जाता, तब तक पीएचडी के रिजल्ट से संबंधित फाइलों को विश्वविद्यालय के वरीय अधिकारियों द्वारा मंजूरी (Approve) नहीं दी जायेगी. यह नयी व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गयी है और इस संबंध में सभी पीजी विभागों के विभागाध्यक्षों (HODs) को पत्र भेजा जा रहा है.

पेन ड्राइव में खाली डेटा मिलने की शिकायतों पर लिया संज्ञान

विश्वविद्यालय प्रशासन को ऐसी कई गंभीर शिकायतें मिली थीं कि शोधार्थियों द्वारा थीसिस के लिए जमा किये गये पेन ड्राइव में डेटा ही नहीं है या वे खाली हैं. यूजीसी (UGC) के नियमानुसार शोध गंगा पर थीसिस अपलोड करना अनिवार्य है, जिसके बाद ही पीएचडी अवार्ड की घोषणा की जा सकती है. इन अनियमितताओं को देखते हुए कुलपति ने इस प्रक्रिया को अनिवार्य बनाने का निर्णय लिया है.

लंबे समय से बंद थी अपलोडिंग प्रक्रिया

विवि सूत्रों की मानें तो विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी में शोध गंगा पर थीसिस अपलोड करने की प्रक्रिया जुलाई, 2025 के बाद से बाधित थी. बताया जा रहा है कि शोध शाखा से थीसिस की सॉफ्ट और हार्ड कॉपी लाइब्रेरी तक नहीं भेजी जा रही थी, जिसके कारण काम अटका हुआ था. अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस ढिलाई को खत्म करने के लिए कमर कस ली है.

परीक्षा नियंत्रक ने दी जानकारी

इस मामले पर विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो विनोद कुमार ओझा ने कहा कि प्रशासन के निर्देशानुसार सभी पीजी विभागों के अध्यक्षों को पत्र भेजा जा रहा है. नयी व्यवस्था के तहत शोधार्थियों को अनिवार्य रूप से शोध गंगा पर थीसिस अपलोड करने की पुष्टि विवि को देनी होगी. इसके बाद ही उनका रिजल्ट फाइनल किया जायेगा.

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लेखक के बारे में

By Sanjeev kumar jha

संजीव कुमार झा प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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