भागलपुर में बाढ़ का कहर लोगों की जिंदगी के हर पहलू को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है. तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के टिल्हाकोठी स्थित बाढ़ राहत शिविर में गुरुवार को पेट की आग बुझाने के लिए अजब बेबसी और अफरातफरी का नजारा देखने को मिला.
सामुदायिक किचन में भोजन के लिए बाढ़ पीड़ित अचानक बेकाबू हो गए और भात पर टूट पड़े, जिससे कुछ देर के लिए हंगामे जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई. वहीं दूसरी ओर, पूरा टीएमबीयू कैंपस जलमग्न होने के बावजूद छात्रों के भविष्य को देखते हुए परीक्षा विभाग का काउंटर खोल दिया गया है, जहां छात्र नाव के सहारे पहुंचकर अपनी डिग्रियां प्राप्त कर रहे हैं.
भात के लिए मची छीना-झपटी, पुलिस को करना पड़ा हस्तक्षेप
गुरुवार दोपहर करीब एक बजे टिल्हाकोठी स्थित सामुदायिक किचन में जब भोजन परोसा जा रहा था, तब महिला, पुरुष और बच्चों की भारी भीड़ अचानक वहां उमड़ पड़ी.
- शिविर के जिम्मेदारों के अनुसार, लोगों को बैठाकर खिलाने के लिए टेबल और कुर्सियों की व्यवस्था की गई थी, लेकिन भूख से बेहाल कुछ लोग कतार में लगने के बजाय सीधे किचन में घुस गए और भात लेने के लिए टूट पड़े.
- भीड़ इतनी बेकाबू हो गई कि भोजन बांट रहे कर्मी भी स्थिति संभाल नहीं पाए.
- माहौल बिगड़ता देख शिविर प्रबंधकों ने तत्काल स्थानीय विश्वविद्यालय (विवि) थाना पुलिस को सूचना दी. पुलिस के पहुंचने के बाद किसी तरह भीड़ को शांत कराया गया. प्रबंधकों ने शिकायत की है कि सुरक्षा व्यवस्था की पूर्व मांग के बावजूद अब तक पुलिस बल की स्थायी प्रतिनियुक्ति नहीं की गई है.
फूड इंस्पेक्टर ने खुद खाकर परखी भोजन की गुणवत्ता
भोजन को लेकर मची इस अफरातफरी के बीच, फूड इंस्पेक्टर राजहंस कुमार राजहंस ने टिल्हाकोठी राहत शिविर का औचक निरीक्षण किया. उन्होंने सामुदायिक किचन में बने भोजन को खुद खाकर उसकी गुणवत्ता जांची. साथ ही, किचन में इस्तेमाल हो रहे मसालों के पैकेट और उनकी एक्सपायरी डेट की भी सघन जांच की. फूड इंस्पेक्टर ने पुष्टि की है कि भोजन पूरी तरह मानक के अनुरूप और सुरक्षित तैयार किया जा रहा है.
कैंपस में भरा बाढ़ का पानी, नाव से डिग्री लेने पहुंच रहे छात्र
बाढ़ के पानी ने टीएमबीयू कैंपस को चारों तरफ से घेर लिया है और परीक्षा विभाग के कार्यालय (ग्राउंड फ्लोर) के अंदर भी पानी भर गया है. प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की भारी परेशानी को देखते हुए गुरुवार को कर्मचारियों ने बाढ़ के पानी के बीच ही काउंटर खोल दिया. छात्र अब नाव पर सवार होकर काउंटर तक पहुंच रहे हैं. मुंगेर से आए छात्र सुनील कुमार ने बताया कि वह नौकरी के लिए जरूरी डिग्री लेने तीन दिन से आ रहे थे और लौट रहे थे. गुरुवार को काउंटर खुलने पर उन्हें नाव से जाकर अपनी डिग्री मिल गई, जिससे उन्होंने राहत की सांस ली.