Bhagalpur news आत्मज्ञान से ही परम शांति व मोक्ष की प्राप्ति संभव

मनुष्य के जीवन का लक्ष्य शांति और मोक्ष की प्राप्ति है, इसके लिए आत्मज्ञान अत्यंत आवश्यक है.

मनुष्य के जीवन का लक्ष्य शांति और मोक्ष की प्राप्ति है, इसके लिए आत्मज्ञान अत्यंत आवश्यक है. आत्मज्ञान ही व्यक्ति को जीवन-मरण के बंधन से मुक्त करता है. उक्त बातें हरिद्वार से पधारे संत स्वामी सुबोधानंद महाराज ने नयी दुर्गा स्थान प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर कही. संत पथिक सेवा समिति की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के समापन समारोह में बुधवार को काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे. स्वामी जी ने कहा कि भागवत महापुराण सभी पुराणों में श्रेष्ठ है और सत्संग से जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है. आत्मज्ञान होने पर व्यक्ति दुख, क्लेश, चिंता और भय से मुक्त हो जाता है. उन्होंने कहा कि आत्मज्ञान की प्राप्ति के बाद जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति संभव है. जीव का सच्चा साथी केवल ईश्वर ही है. मनुष्य भले ही ईश्वर को भूल जाए, लेकिन ईश्वर कभी अपने भक्त को नहीं भूलते. कथा के दौरान कलियुग में भागवत कथा श्रवण की महिमा तथा राजा परीक्षित के मोक्ष प्राप्ति के प्रसंग को विस्तार से सुनाया. कथा में कृष्ण-सुदामा मिलन की सजीव और मनोहारी झांकी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया. स्वामी जी ने बताया कि जीवात्मा रूपी सुदामा धर्मपत्नी सुशीला की प्रेरणा से प्रभु दर्शन के लिए अग्रसर होते हैं. भागवत महापुराण भगवान श्रीकृष्ण का वाङ्मय स्वरूप है, जिसके श्रवण-मनन से भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है. मुख्य यजमान भीम मोदी व उनकी धर्मपत्नी की उपस्थिति में व्यास पूजन किया गया. समिति अध्यक्ष ने बताया कि गुरुवार को हवन-पूजन के पश्चात प्रतिमा का विसर्जन होगा और नववर्ष के प्रथम दिन कथा का समापन होगा. समिति के अरुण चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापन किया. आयोजन की सफलता में त्रिवेणी शर्मा, अरुण कुमार चौधरी, कपिलकांत, विजय सिंह, वासुदेव रामुका, विजय निराला, शिवम कुमार, चरित्र ठाकुर, केदार साह सहित अनेक लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.

भागवत कथा का जिप अध्यक्ष ने किया उद्धघाटन

भागलपुर जिप अध्यक्ष बिपिन कुमार मंडल ने रंगरा प्रखंड जहांगीरपुर बैसी पंचायत स्थित साधोपुर गांव में आयोजित भागवत कथा महोत्सव का फीता काट कर उद्घाटन किया. मंच से कथा वाचिका उमा शक्ति ने धर्म, कर्म, भक्ति, संस्कार व सदाचार पर आधारित प्रेरणादायी प्रवचन कर उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया. बच्चों को शिक्षा एवं संस्कार से जोड़ना समय की आवश्यकता बताया. कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर आयोजकों व ग्रामीणों ने माल्यार्पण व अंगवस्त्र से सम्मानित किया. उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका अभिनंदन किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय एवं उत्साहपूर्ण हो उठा. माैके पर सरपंच मनीषा कुमारी, मुरारी लाल, रंजन यादव, सौरभ कुमार, शुभम कुमार व अन्य ग्रामीण मौजूद थे.

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Published by: Jitendra tomar

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