बहुप्रतीक्षित गंगा जल लिफ्ट सिंचाई परियोजना को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक सक्रियता बढ़ गयी है. योजना के तहत गंगा नदी के अतिरिक्त जल को बाढ़ के समय बांका के बडुआ जलाशय और मुंगेर के खड़गपुर जलाशय तक पहुंचाया जायेगा. पिछले करीब एक माह से कार्य ठप रहने के बाद अब विभागीय पहल तेज हो गयी है और मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया को गति देने के लिए अधिकारियों की टीम ने स्थल निरीक्षण किया. कंपनी के सहायक मैनेजर अतुल कुमार सिंह ने बताया कि किसान की जमीन का मुआवजा निर्धारण को लेकर अधिकारियों ने शुक्रवार को कमरगंज मौजा में जमीन का स्थलीय निरीक्षण किया. शुक्रवार को डीएलओ राकेश कुमार, एडीएलओ विक्रम कुमार, जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता मुकेश कुमार, सहायक अभियंता रोशन कुमार, सीओ सहित कंपनी के सहायक मैनेजर अतुल कुमार सिंह, साइट इंचार्ज बाबर खान व अन्य अधिकारियों ने संयुक्त रूप से कमरगंज मौजा में भूमि का निरीक्षण किया. करीब 19.07 एकड़ भूमि का मूल्यांकन किया गया. टीम ने करीब 19.07 एकड़ भूमि का आकलन कर जमीन की श्रेणी, उपयोगिता और मुआवजा तय करने की प्रक्रिया शुरू की.
24 अप्रैल तक फैसला, मुआवजा के बाद ही शुरू होगा काम
कंपनी के सहायक मैनेजर अतुल कुमार सिंह ने बताया कि 24 अप्रैल तक मुआवजा निर्धारण को लेकर कमेटी अंतिम निर्णय लेगी. किसानों से बातचीत कर उनकी जमीन की प्रकृति और दर का आकलन किया जा रहा है. मुआवजा भुगतान के बाद निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया जायेगा.रुके काम से बढ़ी चिंता, कंपनी को हो रहा नुकसान
परियोजना से जुड़े कार्य पिछले 30 दिनों से बंद है, जिससे कंपनी को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गयी है. अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि अब प्रक्रिया तेज कर दी गयी है और जल्द ही कार्य पटरी पर लौटेगा. स्थलीय निरीक्षण में रैयतों की मौजूदगी में जमीन की मापी और श्रेणी निर्धारण किया गया. अधिकारियों ने किसानों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और पारदर्शी तरीके से मुआवजा तय करने का भरोसा दिलाया. अधिकारियों ने बताया कि फाइनल नोटिस और मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य में तेजी लायी जायेगी.1627 करोड़ की योजना से बदलेगी तस्वीर
करीब 1627 करोड़ रुपये की यह महत्वाकांक्षी परियोजना क्षेत्र के कृषि परिदृश्य को बदलने वाली मानी जा रही है. परियोजना पूरी होने के बाद किसानों को वर्षभर सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि होगी और उनकी आय में सुधार आयेगा. स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि यह योजना क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगी.
