BHGALPUR : विक्रमशिला सेतु संकट : जल्द तैयार हो जायेगा बेली ब्रिज, एक साथ दो टीम कर रही काम

विक्रमशिला सेतु संकट से पार पाने के लिए प्रशासन युद्धस्तर पर काम कर रहा है. प्रति दिन सुबह से लेकर रात पर विभिन्न तरीके से काम हो रहा है.

भागलपुर से ब्रजेश/ललित की रिपोर्ट :

विक्रमशिला सेतु संकट से पार पाने के लिए प्रशासन युद्धस्तर पर काम कर रहा है. प्रति दिन सुबह से लेकर रात पर विभिन्न तरीके से काम हो रहा है. ड्रोन कैमरे से लेकर स्थलीय निरीक्षण का दौर जारी है. इससे लोगों में आशा जगी है कि जल्द ही आवागमन के लिए वैकल्पिक सुविधा मिल जायेगी. मालूम हो कि बेली ब्रिज निर्माण को लेकर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की सौ सदस्यीय टीम 12 मई को भागलपुर पहुंचेगी. जिला पदाधिकारी डॉ नवल किशोर चौधरी ने प्रभात खबर को बताया कि टीम में अधिकार व कर्मी रहेंगे. जिला प्रशासन की ओर से उनके रहने की पूरी व्यवस्था कर दी गयी है. बीआरओ के टीम के आने की सूचना पर जिला प्रशासन की ओर से पूरी तैयारी कर दी गयी है. जिला प्रशासन टीम को रहने की ऐसी जगह व्यवस्था की है जहां पूरी टीम एक साथ रह सके. इसके लिए रहने पूरी व्यवस्था रहेगी. टीम के पहुंचने के साथ ही ब्रिज निर्माण शुरू हो जायेगा. पहले से आयी टीम के एक्सपर्ट व कर्मियों के द्वारा सेतु के ऊपर से सारी तकनीकी जानकारी तैयार की जा रही है. सेतु पर मार्किंग के अलावा अन्य काम किये जा रहे हैं. पुल में जो भी कमियां हैं उसे देखा जा रहा है. जिला प्रशासन की ओर से भी स्थिति पर पूरी नजर रखी जा रही है.

पुल के टूटे और कमजोर हिस्सों की बारीकी से की जांच

विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर यातायात बहाल करने की दिशा में तेजी से काम शुरू हो गया है. रविवार को मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज (एमइएस) की तकनीकी टीम ने सेतु का विस्तृत निरीक्षण किया. टीम ने पुल के ऊपरी और निचले हिस्सों की गहन जांच की और संरचना की मजबूती को समझने के लिए विभिन्न स्थानों पर मापी की गयी. विक्रशिला सेतु का करीब 34 मीटर लंबा स्लैब गंगा नदी में समाया है और इस कारणवश नवगछिया और भागलपुर के बीच संपर्क कट गया है. यातायात प्रभावित हुआ है. स्थिति को देखते हुए लगभग 49 मीटर लंबा बेली ब्रिज तैयार कर अस्थायी रूप से आवागमन बहाल करने की योजना पर काम चल रहा है. अधिकारियों के अनुसार रिपोर्ट मिलने के बाद जल्द ही स्लैब निर्माण कार्य शुरू किया जायेगा, ताकि इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात को फिर से सामान्य किया जा सके.

सेतु के दोनों ओर 7.5-7.5 मीटर क्षेत्र

एमइएस की टीम ने निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि क्षतिग्रस्त हिस्से के दोनों ओर लगभग 7.5-7.5 मीटर क्षेत्र अभी भी सुरक्षित है, जिसका उपयोग बेली ब्रिज के निर्माण के लिए किया जा सकता है. टीम ने ड्रोन कैमरे की मदद से पुल के टूटे और कमजोर हिस्सों की भी बारीकी से जांच की, ताकि किसी भी तकनीकी पहलू को अनदेखा न किया जा सके.

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By AMIT KUMAR SINH

AMIT KUMAR SINH is a contributor at Prabhat Khabar.

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