– सैंडिस कंपाउंड में ठाकुर अनुकूलचंद्र महाराज के 138वें जन्म दिवस पर आयोजन, सारंग लाल दास बोले
सर्वप्रथम हमें दुर्बलता के विरुद्ध युद्ध करना होगा. साहसी बनना होगा. वीर बनना होगा. पाप की ज्वलंत प्रतिमूर्ति दुर्बलता है. जितना संभव हो इसे भगाओ. रक्तशोषणकारी अवसाद-उत्पादक को स्मरण करो, तुम साहसी हो, स्मरण करो तुम शक्ति के तनय हो, स्मरण करो तुम परमपिता की संतान हो. पहले साहसी बनो, अकपट बनो, तभी समझा जायेगा धर्मराज्य में प्रवेश करने का तुम्हारा अधिकार हुआ है. उक्त बातें वरिष्ठ प्रतिरित्विक सारंग लाल दास ने सत्संगी वृंद और उत्सव समिति की ओर से सैंडिस कंपाउंड मैदान में रविवार को ठाकुर अनुकूलचंद्र महाराज के 138वें जन्म दिवस पर आयोजित याजन परिक्रमा समारोह में कही. समारोह में पूर्वी बिहार व निकटवर्ती झारखंड के हजारों भक्तों का जुटान हुआ. सारंग लाल दासजी सत्यानुसरण के विचारों को भक्तों को अवगत करा रहे थे.खगड़िया के भक्त शानू कुमार ने कहा कि मनुष्य मनुष्य है ही नहीं. जब उनके जीवन में आदर्श नहीं है. ठाकुर अनुकूलचंद्र को अपना आदर्श बनाने की जरूरत है. आग को तपाने पर, उसका रंग बदलता है. ठाकुर अनुकूलचंद्र आग हैं. आयोजन समिति के सचिव उज्जवल कुमार मिश्र ने कहा कि भागलपुर शहर के बीचोंबीच सैंडिस कंपाउंड में दूसरी बार यह आयोजन हो रहा है. इससे पहले 2007 में हुआ था. हालांकि भागलपुर के अलग-अलग हिस्सों में नियमित आयोजन होता रहा है. यहां 37 हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं. तपन चटर्जी ने कहा कि याजन परिक्रमा कार्यक्रम में भक्तों के अनुभव से अवगत होकर बहुत अच्छा लगा. श्रद्धालुओं की भीड़ ने साबित किया कि गुरुदेव ठाकुर अनुकूलचंद्र के विचारों का फैलाव दूर-दूर तक है.
आज जगमग दुनिया सारा, हर जीवन प्रकाशित करने आया रे….भजन सत्र में तपश्रना मौलिक ने आज जगमग दुनिया सारा, हर जीवन प्रकाशित करने आया रे…, कलियुग में आया प्रभु जी. जिनका नाम श्री अनुकूल हैं…भजन गाकर माहौल को भक्तिमय कर दिया. इसी क्रम में लक्ष्य दास ने जिनसे प्रीत लगाना चाहिए…, ईश ने जो मेरे प्रीतम से प्रीत करे, मोहे प्यारा लगे…, धीरा ने दीन दयाल दाता मेरे…, प्रत्युषा कुमारी ने भी एक से एक भजन प्रस्तुत किया.
हजारों भक्तों ने ग्रहण किया प्रसादयाजन व भजन परिक्रमा समारोह के दौरान महाभंडारा का आयोजन हुआ. दिनभर अलग-अलग समय का प्रसाद भक्तों के बीच बांटा गया. आयोजन में अध्यक्ष दीपक कुमार लाल, वरिष्ठ प्रतिरित्विक अमरेंद्र कुमार सिंह, हंसडीहा से गिरधारी यादव, सुब्रत मौलिक, दीपक कुमार, राजन कुमार, अमरेंद्र कुमार, संतोष यादव, कोषाध्यक्ष नीरज कुमार साह, नंदकिशोर पोद्दार, भुवन मोहन पोद्दार, मनोज कुमार सिंह, निरंजन झा, वासुदेव मंडल, रोशन कुमार सिंह आदि का विशेष योगदान रहा.
