नवगछिया अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक के निजी क्लिनिक की जांच करने से हड़कंप मच गया. अनुमंडल अस्पताल नवगछिया के उपाधीक्षक पिकेंश कुमार कई निजी क्लिनिक की जांच की. अनुमं डल पदाधिकारी के निर्देश पर निजी क्लिनिक की जांच की गयी. जीवन ज्योति क्लिनिक की जांच में क्लिनिक का रजिस्ट्रेशन था. अग्नि सुरक्षा सर्टीफिकेट, सेनरजिक सर्टीफिकेट, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट चिकित्सक ने दिखाया. चिकित्सक कौशल कुमार को निर्देश दिया गया कि क्लिनिक में काम करने वाली महिला को सेक्सुअल हरासमेंट को रोकने के लिए ओतरिक सुरक्षा समिति का गठन कर सूचना दे. जिस संस्थान में 10 महिला-पुरुष काम करते हैं, वहां आंतरिक सुरक्षा समिति का गठन करना आवश्यक होता है. जीरोमाइल स्थित उषा आर्थो केयर एंड पॉलीक्लिनिक का रजिस्ट्रेन नहीं था. क्लिनिक बंद पाया गया. क्लिनिक के मेडिकल कर्मी ने बताया कि अनुमंडल अस्पताल में काम करने वाले चिकित्सक हेम्फर कुमार क्लिनिक चलाते हैं. जीवन सुरक्षा हाॅस्पिटल में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं थे. वहां प्रसव पीड़ित महिला श्रीपुर के कांग्रेस सिंह की पत्नी क्रांति कुमारी भर्ती थी. क्रांति कुमारी ने बतायी कि अनुमंडल अस्पताल की आशा कार्यकर्ता ने इस क्लिनिक में भर्ती करवाया था. क्लिनिक में क्लिनिक का रजिस्ट्रेशन नंबर, अग्नि सुरक्षा सर्टीफिकेट, सेनरजिक सर्टीफिकेट, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट नहीं दिखाया गया. श्रीहेल्थ केयर सेंटर कई प्रसव पीड़ित महिला भर्ती थी, जिसमें जमुनिया के रामू कुमार की पत्नी नेहा कुमारी, ढोरिया दादपुर के राहुल की पत्नी अनिशा कुमारी, कोशकीपुर की सोनू कुमार की पत्नी आशा कुमारी थी. सभी रोगियों ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं ने यहां भर्ती करवाया है. क्लिनिक का रजिस्ट्रेशन नंबर दो जगह अलग-अलग लिखा था. अग्नि सुरक्षा सर्टीफिकेट, सेनरजिक सर्टीफिकेट, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट नहीं दिखाया गया. उपाधीक्षक पिकेंश कुमार ने बताया कि रिपोर्ट को अनुमंडल पदाधिकारी को सौंपा जायेगा. आशा कार्यकर्ता कमीशन के चलते गर्भवती महिला को निजी क्लिनिक में भर्ती करवाती है. गर्भवती महिलाओं की देखरेख आशा कार्यकर्ताओं को करना होता है. आशा कार्यकर्ता भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ हैं, जो घर-घर जाकर स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी देती हैं. गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को स्वास्थ्य सेवाओं (टीकाकरण, प्रसव, पोषण, परिवार नियोजन) से जोड़ती हैं और समुदाय में जागरूकता फैलाती हैं, जिससे प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में मदद मिलती है. किंतु आशा कार्यकर्ता कमीशन के लिए गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने के बजाय निजी क्लिनिक में भर्ती करवाती है. अस्पताल से बहुत कम सुविधा निजी क्लिनिक में होती है. मौके स्वास्थ्य प्रबंधक जितेंद्र कुमार, पंकज कुमार मौजूद थे.
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