सोमवती अमावस्या पर कहलगांव के गंगा घाटों पर उमड़ी भीड़, पुण्य स्नान के लिए श्रद्धालुओं ने लगायी डुबकी
Somvati Amavasya 2026 : सर्वार्थ सिद्धि योग, मृगशिरा नक्षत्र, सूर्य के मिथुन राशि में प्रवेश और अधिक मास की समाप्ति के दुर्लभ संयोग ने सोमवती अमावस्या को और विशेष बना दिया. इसी पावन अवसर पर कहलगांव के उत्तरवाहिनी गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और सुबह से ही गंगा स्नान, पूजा-अर्चना तथा दान-पुण्य का दौर चलता रहा.
कहलगांव, भागलपुर से रिपोर्ट
Bhagalpur News : सोमवती अमावस्या के अवसर पर सोमवार को कहलगांव के उत्तरवाहिनी गंगा घाटों पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बने दुर्लभ संयोग के कारण अहले सुबह से ही श्रद्धालु गंगा घाटों पर पहुंचने लगे और पुण्य काल में स्नान कर धर्म लाभ अर्जित करते रहे.
पंचांग के अनुसार, पुण्य काल रविवार सुबह 11:21 बजे से शुरू होकर सोमवार सुबह 08:24 बजे तक रहा. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की.
दुर्लभ संयोग ने बढ़ाया सोमवती अमावस्या का महत्त्व
धार्मिक जानकारों के अनुसार इस बार सोमवती अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग, मृगशिरा नक्षत्र, सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश और अधिक मास की समाप्ति का विशेष संयोग बना. इसी कारण इस दिन गंगा स्नान और पूजा-अर्चना का महत्व कई गुना बढ़ गया.हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, फिर भी प्रमुख घाटों पर दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही.
मौन व्रत और गंगा स्नान का विशेष महत्त्व
एलसीटी घाट निवासी साहित्य वाचस्पति आचार्य रामजी मिश्र रंजन ने बताया कि उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान और भगवान महादेव के जलाभिषेक से नवग्रह जनित कष्टों का निवारण होता है. सोमवती अमावस्या पर मौन व्रत रखने का भी विशेष महत्व माना गया है.उन्होंने कहा कि इस दिन मौन रहकर गंगा का स्मरण करने से वाणी दोष दूर होते हैं और मन की शुद्धि होती है. धार्मिक अनुष्ठानों के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी आवश्यक बताते हुए उन्होंने लोगों से गंगा की स्वच्छता बनाए रखने की अपील की.
गंगा संरक्षण का लिया जाये संकल्प
आचार्य रामजी मिश्र रंजन ने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं बल्कि जीवनदायिनी धारा है. इसलिए पूजा सामग्री, प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को नदी में प्रवाहित नहीं करना चाहिए. घाटों की स्वच्छता बनाए रखना और बरगद-पीपल जैसे वृक्षों की रक्षा करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है.उन्होंने युवाओं से जल, वृक्ष और नदी संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि नई पीढ़ी प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक होगी तो धर्म और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रहेंगे.
घाट किनारे कारोबारियों की बढ़ी आमदनी
सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही का सकारात्मक असर स्थानीय कारोबार पर भी देखने को मिला. घाट किनारे दुकान चलाने वाले संतोष कुमार चौरसिया ने बताया कि अन्य दिनों की तुलना में सुबह से ही ग्राहकों की अच्छी आवाजाही रही.उन्होंने कहा कि पूजा सामग्री, प्रसाद और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की बिक्री बढ़ने से कारोबार में भी अच्छा सुधार देखने को मिला है. श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण स्थानीय दुकानदारों की आमदनी में भी बढ़ोतरी हुई.