भागलपुर के बहुचर्चित दवा व्यवसायी पुत्र रौनक केडिया (22 वर्ष) हत्याकांड में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश 19, खुशबू श्रीवास्तव की अदालत ने अहम फैसला सुनाया है. महज 8 लाख रुपये के लेन-देन के विवाद में रची गई इस खौफनाक साजिश का अंत अदालत के कड़े फैसले के साथ हुआ है. न्यायालय ने इस निर्मम हत्याकांड में शामिल मुख्य साजिशकर्ता सहित दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जबकि हथियार छिपाने वाले तीसरे अभियुक्त को 7 साल की कड़ी सजा मिली है.
अदालत का फैसला: किसे मिली क्या सजा?
अदालत में अपर लोक अभियोजक जयप्रकाश मंडल की दलीलों और पुलिस के ठोस सबूतों के आधार पर तीन अभियुक्तों को सजा मुकर्रर की गई है:
| अपराधी का नाम | आरोप व भूमिका | न्यायालय द्वारा दी गई सजा |
| अमित कुमार सिंह (उर्फ अमित मंडल) | मुख्य साजिशकर्ता व हत्या का दोषी | आजीवन कारावास व आर्म्स एक्ट में सजा, साथ ही भारी जुर्माना |
| आलोक राज (उर्फ दिलखुश) | हत्या का दोषी | आजीवन कारावास व आर्म्स एक्ट में सजा, साथ ही भारी जुर्माना |
| अजीत कुमार (उर्फ अम्का) | वारदात में प्रयुक्त हथियार छिपाना | 7 वर्ष का कठोर कारावास व 5 वर्ष की अतिरिक्त सजा (जुर्माने के साथ) |
(नोट: जुर्माना न भरने की स्थिति में सभी दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.)
7 अगस्त की वह खौफनाक रात: पिता ने टॉर्च की रोशनी में पहचाना बेटे का शव
यह हत्याकांड भागलपुर के लिए एक सदमा था, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था:
- दुकान से लौट रहा था रौनक: 7 अगस्त 2024 की रात करीब 10 बजे रौनक एमपी द्विवेदी रोड स्थित अपनी दुकान 'आत्माराम मेडिकल' बंद कर काजवलीचक स्थित अपने घर लौट रहा था.
- रास्ते में घात लगाए बैठे थे कातिल: विनोद कुमार जैन के घर के पास पहुंचते ही अपराधियों ने उसे पीछे से गोली मार दी.
- पिता का दर्दनाक सामना: कुछ देर बाद उसी रास्ते से लौट रहे रौनक के पिता बलराम केडिया ने सड़क पर एक युवक को खून से लथपथ देखा. जब उन्होंने मोबाइल की टॉर्च जलाई, तो वह कोई और नहीं, उनका अपना बेटा रौनक था. इलाज के लिए जीरोमाइल स्थित अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
8 लाख का विवाद और 10 दिन में पुलिस का खुलासा
इस हत्याकांड के बाद शहर में भारी जनाक्रोश और आंदोलन देखने को मिला था, जिसके बाद पुलिस ने रिकॉर्ड समय में मामले का पर्दाफाश किया:
- हत्या का कारण: तत्कालीन एसएसपी आनंद कुमार के अनुसार, अमित और रौनक के पिता के बीच आठ लाख रुपये के लेन-देन का विवाद था. इसी खुन्नस में अमित ने 2 लाख रुपये में शूटर हायर कर रौनक की हत्या करवा दी.
- पुलिस की वैज्ञानिक जांच: पुलिस ने महज 10 दिनों के भीतर कांड का उद्भेदन किया. इस दौरान 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और 400 से ज्यादा मोबाइल नंबरों का डंप डेटा विश्लेषित किया गया.
- अंतरराज्यीय छापेमारी: बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में लगातार छापेमारी के बाद अपराधियों को दबोचा गया और अजीत की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद किया गया, जो कोर्ट में अहम सबूत साबित हुआ.
