Bhagalpur news श्रीराम कथा के पांचवें दिन अहिल्या उद्धार व सीताराम विवाह की कथा

कहलगांव गौघट्टा उत्तरटोला स्थित काली मंदिर परिसर में चल रहे श्रीराम कथा

कहलगांव गौघट्टा उत्तरटोला स्थित काली मंदिर परिसर में चल रहे श्रीराम कथा के पांचवें दिन कथावाचक आचार्य धनंजय वैष्णव ने कहा कि पौराणिक कथाओं में वशिष्ठ और विश्वामित्र ऐसे दो उज्ज्वल नक्षत्र हैं, जिनके प्रभाव से जीवन के कई पक्ष आलोकित होते हैं. किंतु वह परस्पर प्रतिद्वंद्वी भी थे. लोग पितामह ब्रह्मा के सुपुत्र वशिष्ठ के चरित्र ज्ञान की गरिमा से ओतप्रोत थे. नंदिनी गाय को लेकर विश्वामित्र वशिष्ठ में लंबा संघर्ष चला था. ईश्वर ने क्षत्रिय जाति में जन्म लेकर विश्वामित्र की इस धारणा पर व्यंग नहीं किया था कि क्षत्रिय जाति सर्वथाहीन है और ब्राह्मण तो हीन जीवन की चरम सार्थकता है, फिर क्षत्रिय भी कौन जिनके आचार्य वशिष्ठ हैं. उनका अंतरण प्रभु के दर्शन की उत्कंठा से भर उठा, वह उसे चांद की कल्पना करने लगे, जब ब्राह्मण के दिव्य चरण कमल के दर्शन प्राप्त करेंगे. उन्होंने अहिल्या उधार, जनकपुर प्रवेश, कुश वाटिका प्रसंग, धनुष यज्ञ प्रसंग, बारात आगमन, श्री सीताराम जी विवाह महोत्सव की कथा का सप्रसंग व्याख्या किया. उन्होंने कहा कि जो इस भवसागर से पार जाना चाहता है उसके लिए श्री राम कथा मजबूत नाम है, जो बैठेगा वह भवसागर से पार हो जायेगा. जन्म-मरण के 84 लाख के चक्र से मुक्त होकर के परमात्मा का शरण पायेगा.

जो काम प्रेम से संभव वह हिंसा से असंभव : नारायण दास

भागवत कथा के 10वें दिन सैदपुर उवि मैदान में चल रहे भागवत कथा महाकुंभ पर श्री वृंदावन धाम से पधारे कथा वाचक सरल संत नारायण दास जी महाराज ने भक्तों को श्रीमद् भागवत पुराण के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया. उन्होंने श्रीकृष्ण के विभिन्न रूपों व उनकी लीलाओं सहित कंस वध जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों के बारे में बताया. उन्होंने भक्तों को भक्ति, ज्ञान व वैराग्य के बारे में बताया. भगवान श्रीकृष्ण के वात्सल्य प्रेम के अलावा उनकी विभिन्न लीलाओं का वर्णन कर वर्तमान समय में समाज में व्याप्त अत्याचार, अनाचार, कटुता, व्यभिचार को समाप्त कर सुंदर समाज के निर्माण के लिए युवाओं को प्रेरित किया. श्री रास लीला, मथुरा गमन, दुष्ट कंस राजा के अत्याचार से मुक्ति के लिए कंस वध व सुदामा चरित्र का वर्णन कर भक्तों को भक्ति रस में डुबा दिया. इस दौरान भजन गायन ने उपस्थित भक्तों को नाचने पर मजबूर कर दिया. कथावाचक ने सुंदर समाज के निर्माण के लिए गीता के कई उपदेशों से अपने को उस अनुरूप आचरण करने को कहा. जो काम प्रेम के माध्यम से संभव है, वह हिंसा से संभव नहीं हो सकता है. ग्रामीणों ने इस संगीतमय भागवत कथा का आनंद उठाया. भागवत कथा से गांव का माहौल भक्तिमय हो गया है.

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By JITENDRA TOMAR

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