भागलपुर: राघोपुर में गंगा के रौद्र रूप के आगे सारे सरकारी इंतजाम बेबस, 12 दिनों से भीषण कटाव जारी

भागलपुर के राघोपुर में गंगा नदी का विनाशकारी कटाव जारी है, जिसने प्रशासन के तमाम दावों की पोल खोल दी है. 12 दिनों से हो रहे इस कटाव ने एक सदी पुराने ऐतिहासिक चैती दुर्गा मंदिर को लील लिया है और अब रेलवे लाइन पर भी खतरा मंडरा रहा है.

भागलपुर जिले के गोपालपुर प्रखंड अंतर्गत राघोपुर में गंगा नदी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. पिछले 10-12 दिनों से जारी विनाशकारी कटाव ने जल संसाधन विभाग और प्रशासन के तमाम दावों और तकनीकी रणनीतियों की पोल खोल कर रख दी है. सरकार और जिला प्रशासन की पूरी ताकत झोंके जाने के बावजूद गंगा लगातार उपजाऊ जमीन, आशियानों और धरोहरों को अपने आगोश में ले रही है. मंगलवार को करीब एक सदी पुराने ऐतिहासिक चैती दुर्गा मंदिर का बड़ा हिस्सा गंगा में समा जाना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि गंगा की अजेय धार के आगे मानव निर्मित सारे प्रयास बौने साबित हो रहे हैं. अब कटाव की सीधी जद में महत्वपूर्ण रेलवे लाइन और राघोपुर-काजीकोरैया क्षेत्र का शेष जमींदारी बांध आ गया है.

राजनीतिक व प्रशासनिक केंद्र बना राघोपुर, फिर भी आफत बेकाबू

राघोपुर इस समय पूरे सूबे के राजनीतिक और प्रशासनिक मानचित्र का केंद्र बिंदु बना हुआ है:

  • वीवीआईपी क्षेत्र: यह इलाका ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बूलो मंडल का पैतृक आवास है और पथ निर्माण मंत्री ई. कुमार शैलेंद्र का विधानसभा क्षेत्र है. दोनों मंत्री लगातार ग्राउंड जीरो पर कैंप कर रहे हैं.
  • हवाई निरीक्षण और आला अफसरों का पहरा: उप मुख्यमंत्री/मुख्यमंत्री स्तर से हवाई सर्वेक्षण किए जाने के साथ-साथ डीएम, जल संसाधन विभाग के वरीय अधिकारी और मुख्य अभियंता दिन-रात मौके पर मौजूद हैं.
  • क्रूज से महा-अभियान: बचाव कार्य के लिए पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर विशाल क्रूज, मेगा बैग, जियो बैग, बोल्डर और एनसी क्रेटिंग की मदद से युद्धस्तर पर फ्लड फाइटिंग कराई जा रही है, लेकिन नदी का वेग लगातार इसे बहा ले जा रहा है.

हर घंटे बदल रहा कटाव का भूगोल: करोड़ों के इंतजाम पर गंगा भारी

नदी के अप्रत्याशित स्वभाव के कारण बचाव दल के सामने तकनीकी संकट खड़ा हो गया है:

  • रणनीति पर भारी नदी की धारा: विभाग जिस स्थान पर लाखों रुपये की फ्लड फाइटिंग सामग्री डालकर कटाव थामने का प्रयास करता है, गंगा की धार ठीक उसके आगे या पीछे नए सिरे से जमीन काटना शुरू कर देती है.
  • सिल्ट और बदलता बहाव: नदी तल की गहराई और अत्यधिक वेलोसिटी के कारण कटाव का दायरा हर चंद घंटों में बदल रहा है, जिससे बचाव कार्यों की प्रभावशीलता सीमित हो रही है.

100 साल पुराना मंदिर गंगा में समाया, अब रेलवे लाइन आखिरी निशाना

चैती दुर्गा मंदिर के विलीन होने के बाद रेलवे ट्रैक की सुरक्षा को लेकर आपात स्थिति बनी हुई है:

  • इतिहास बना आस्था का केंद्र: 100 वर्षों से अधिक पुरानी आस्था का केंद्र चैती दुर्गा मंदिर और निकटवर्ती बजरंग बली मंदिर गंगा की उफनती लहरों में समा चुके हैं.
  • रेलवे लाइन बेहद करीब: नदी का पानी रेलवे ट्रैक के बेहद नजदीक पहुंच चुका है. यदि रेलवे लाइन की ओर कटाव का रुख नहीं रोका गया, तो पूर्व बिहार का रेल संपर्क पूरी तरह ठप होने का बड़ा खतरा उत्पन्न हो जाएगा.

आपातकालीन फ्लड फाइटिंग बनाम दीर्घकालिक वैज्ञानिक समाधान

राघोपुर की वर्तमान त्रासदी अब तात्कालिक राहत के बजाय स्थायी समाधान की मांग कर रही है:

  • नीतियों पर सवाल: जानकारों का मानना है कि केवल बालू के बोरे और जियो बैग्स डालकर गंगा के प्रचंड वेग को नहीं रोका जा सकता. इसके लिए ड्रेजिंग, सिल्ट मैनेजमेंट और नदी की मुख्य धारा को वैज्ञानिक तरीके से मोड़ने की दीर्घकालिक नीति अपनानी होगी.
  • सबसे बड़ा सवाल: करोड़ों रुपये के संसाधन और पूरी सरकार के मैदान में उतरने के बाद भी क्या राघोपुर की बची हुई जमीन और रेलवे लाइन को बचाया जा सकेगा?

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By Vipin Thakur

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