नवगछिया अनुमंडल (भागलपुर) के राघोपुर इलाके में गंगा नदी की तेज धारा और भीषण कटाव ने तबाही का एक नया और भयावह मंजर पेश किया है. 24 अगस्त से जारी महा-कटाव के कारण मार्जिनल बांध टूटने के बाद मंगलवार को इलाके की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान रहा करीब 100 वर्ष पुराना चैती दुर्गा मंदिर देखते ही देखते चंद सेकंड में गंगा की उफनती लहरों में विलीन हो गया. मंदिर के नदी में समाने का खौफनाक वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. मंदिर के कटने के बाद अब गंगा का सीधा रुख पुरानी रेलवे लाइन की तरफ हो गया है, जिसे बचाने के लिए प्रशासन युद्धस्तर पर बचाव कार्य में जुटा है.
चंद सेकंड में इतिहास बना 100 साल पुराना मंदिर
कटाव की विभीषिका ने ग्रामीणों की आंखों के सामने उनकी सदियों पुरानी आस्था को निगल लिया:
- भरभराकर गिरा ढांचा: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंदिर के आसपास की जमीन पहले से कट रही थी. मंगलवार को कटाव मंदिर के ठीक नीचे तक पहुंचा और देखते ही देखते पूरा विशाल ढांचा भरभरा कर गंगा में समा गया.
- आस्था पर चोट: ग्रामीणों के लिए यह महज एक इमारत का गिरना नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही उनकी आस्था और इलाके की ऐतिहासिक विरासत का खत्म होना है.
अगला निशाना: 500 मीटर के दायरे में पुरानी रेलवे लाइन पर खतरा
मंदिर और जमींदारी बांध के बाद अब नदी की धारा सीधे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की ओर बढ़ रही है:
- रेलवे लाइन पर दबाव: गंगा का कटाव अब पुरानी रेलवे लाइन के आसपास पहुंच गया है. लगभग 500 मीटर का दायरा बेहद संवेदनशील बना हुआ है.
- इलाका कराया जा रहा खाली: खतरे की गंभीरता को भांपते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने ब्रह्म बाबा स्थान से लेकर महादेवपुर घाट तक रेलवे लाइन के आसपास बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर हटाना शुरू कर दिया है.
बचाव कार्य: जियो बैग्स और हाथीपांव के सहारे जूझ रहा प्रशासन
जल संसाधन विभाग की टीमें कटाव रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं:
- फ्लड फाइटिंग: बालू से भरी बोरियां, विशाल जियो बैग्स और हाथीपांव (लोहे के विशेष ढांचे) लगाकर नदी की धारा को मोड़ने और कटाव की रफ्तार को थामने की कोशिश की जा रही है.
- चुनौती: गंगा की धारा इतनी तीव्र है कि एक जगह कटाव रोकने पर पानी दूसरी जगह जमीन को काटना शुरू कर देता है, जिससे बचाव कार्य बौना साबित हो रहा है.
राघोपुर में गंगा का महासंकट: एक नजर में
| बिंदु (Points) | वर्तमान स्थिति / विवरण |
| कटाव की शुरुआत | 24 अगस्त 2024 से लगातार जारी |
| क्षतिग्रस्त बांध | काजीकोरैय्या-राघोपुर जमींदारी (मार्जिनल) बांध |
| नष्ट हुआ ऐतिहासिक स्थल | लगभग 100 वर्ष पुराना चैती दुर्गा मंदिर |
| ताजा व बड़ा खतरा | पुरानी रेलवे लाइन और आसपास की सघन आबादी |
| संवेदनशील दायरा | लगभग 500 मीटर का क्षेत्र (ब्रह्म बाबा स्थान से महादेवपुर घाट) |
| प्रशासनिक कदम | संवेदनशील इलाकों को खाली कराना व फ्लड फाइटिंग |
ग्रामीणों का आक्रोश और स्थायी समाधान की मांग
मंदिर के टूटने से स्थानीय लोगों में जल संसाधन विभाग के प्रति गहरी नाराजगी है. ग्रामीणों का सवाल है कि जब कटाव कई दिनों से जारी था, तो मंदिर को बचाने के लिए बड़े स्तर पर पहले प्रयास क्यों नहीं किए गए? अब ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि केवल बोरियां डालने की अस्थायी व्यवस्था के बजाय रेलवे लाइन, सड़क और आबादी की सुरक्षा के लिए अविलंब ड्रेजिंग या बोल्डर पिचिंग जैसी स्थायी योजना लागू की जाए.