परिजन व फाइल फोटो मृतक का

भागलपुर में बंदी की इलाज के दौरान मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

जेएलएनएमसीएच के बंदी वार्ड में भर्ती कैदी की इलाज के दौरान मौत हो गई. परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है और जिलाधिकारी से कार्रवाई की मांग की है. मामले की जांच जारी है.

JLNMCH Prisoner Death: जेएलएनएमसीएच के बंदी वार्ड में भर्ती एक कैदी की शुक्रवार को इलाज के दौरान मौत हो गयी. मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में इलाज और व्यवस्था को लेकर सवाल उठाये हैं. मृतक के पिता ने जिलाधिकारी को आवेदन देकर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया और मामले में कार्रवाई की मांग की है. दूसरी ओर, अस्पताल उपाधीक्षक ने परिजनों के आरोप को गलत बताया है. इसी बीच मेडिसिन विभाग ने ड्यूटी पर तैनात पीजी डॉक्टर से स्पष्टीकरण भी मांगा है, जिससे मामले की जांच का दायरा और बढ़ गया है.

मृतक की पहचान बांका जिले के अमरपुर थाना क्षेत्र के जानकीपुर निवासी शंभूशरण पांडेय के पुत्र धीरज कुमार पांडेय उर्फ नटवर के रूप में हुई है. परिजनों के अनुसार धीरज की तबीयत बिगड़ने के बाद 15 सितंबर को उसे कैंप जेल से जेएलएनएमसीएच के बंदी वार्ड में भर्ती कराया गया था. इलाज के दौरान शुक्रवार को उसकी मौत हो गयी.

पिता ने डीएम को दिया आवेदन, इलाज पर उठाये सवाल

मौत के बाद धीरज के पिता ने जिलाधिकारी को आवेदन देकर पूरे मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है. आवेदन में उन्होंने आरोप लगाया है कि डॉक्टरों ने उनके बेटे का सही और समय पर इलाज नहीं किया, जिसके कारण उसकी मौत हुई.

परिजनों ने धीरज की आंख पर चोट के निशान होने का भी जिक्र किया है. उनका कहना है कि आंख पर चोट कैसे लगी, इसकी स्पष्ट जानकारी उन्हें नहीं दी गयी. इससे परिवार की चिंता और बढ़ गयी.

हालांकि, धीरज पहले से लीवर सिरोसिस की बीमारी से ग्रसित था. ऐसे में उसकी मौत की वास्तविक वजह क्या थी और इलाज के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.

मौत के बाद मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पोस्टमार्टम

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने शव का पोस्टमार्टम कराया. डीएम के आदेश पर मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की गयी और कैमरे की निगरानी में पोस्टमार्टम कराया गया. इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया.

पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराये जाने से मामले में आगे की जांच के लिए महत्वपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा. अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों से मौत के कारण को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है.

उधार के मामले में जेल गया था धीरज

धीरज के मामा श्रीनिवास चंद्र तिवारी ने बताया कि धीरज का अपने दोस्त अजीत मिश्रा के साथ पैसों का लेन-देन था. इसी मामले में अजीत ने केस किया था. इसके बाद धीरज ने अदालत में सरेंडर कर दिया था.

मामा के अनुसार, धीरज की जमानत की प्रक्रिया अदालत में चल रही थी. परिवार को उम्मीद थी कि एक-दो दिनों में उसे जमानत मिल सकती है. इसी बीच उसकी तबीयत बिगड़ गयी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी.

परिजनों के मुताबिक धीरज संस्कृत शिक्षा बोर्ड में शिक्षक था. मौत की खबर के बाद परिवार में मातम पसरा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.

अस्पताल ने आरोपों को बताया गलत

जेएलएनएमसीएच के अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. सुरेश प्रसाद ने बताया कि अस्पताल में हंगामे की जानकारी मिली थी. उन्होंने परिजनों की ओर से लगाये गये आरोपों को गलत बताया. उनका कहना था कि शुक्रवार की सुबह डॉक्टर ने बंदी मरीज की जांच की थी और जांच के बाद उसे मृत घोषित किया गया.

अस्पताल उपाधीक्षक के अनुसार, मरीज के परिजन काफी देर बाद अस्पताल पहुंचे थे. अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद मामले में अब दोनों पक्षों के दावों की जांच महत्वपूर्ण हो गयी है.

पीजी डॉक्टर से 24 घंटे में मांगा गया जवाब

मामले में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है. बंदी मरीज धीरज की मौत को लेकर मेडिसिन विभाग के एचओडी ने पीजी डॉक्टर डॉ. संकेत राज से स्पष्टीकरण मांगा है.

18 सितंबर को जारी पत्र के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 5:30 बजे मरीज की हालत गंभीर होने की सूचना दी गयी थी. मेडिसिन विभाग की प्रथम वर्ष की पीजी डॉक्टर डॉ. जिज्ञासा रंजन ने मरीज के अटेंडेंट को दवा का स्लिप देकर दवा लाने के लिए बाहर भेजा था.

पत्र में कहा गया है कि पीओडी में तैनात डॉ. संकेत राज अपने कर्तव्य स्थल पर मौजूद नहीं थे. इसके बाद मरीज की मौत हो गयी. मामले में एचओडी ने डॉ. संकेत राज से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है.

JLNMCH Prisoner Death: अब जांच से स्पष्ट होगा मौत का कारण

एक तरफ परिवार इलाज में लापरवाही और आंख पर चोट के निशान को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं अस्पताल प्रशासन आरोपों को गलत बता रहा है. इसके साथ ही संबंधित डॉक्टर से विभागीय स्पष्टीकरण मांगा गया है और प्रशासन के आदेश पर मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया गया है.

ऐसे में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, अस्पताल के इलाज से जुड़े रिकॉर्ड, ड्यूटी की स्थिति और विभागीय स्पष्टीकरण इस मामले में महत्वपूर्ण होंगे. इन तथ्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि धीरज की मौत बीमारी की गंभीरता के कारण हुई या इलाज के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही की भूमिका रही.

Also Read: JDU के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में नहीं पहुंचे अनंत सिंह, एक मंच पर दिखे नीतीश-निशांत, चल रही है बैठक

Also Read: पटना सिविल कोर्ट को मिली बम से उड़ाने की धमकी, खाली कराया जा रहा परिसर, सर्च ऑपरेशन शुरू

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Atul kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >