बकरीद इस्लाम के दो महत्वपूर्ण त्योहार में से एक है. इसमें अल्लाह के नाम पर जानवरों की कुर्बानी कर अपनी शान-ए-बंदगी का इजहार करते हैं. सबसे पहले यह काम अल्लाह के पैगंबर हजरत इब्राहिम अलैह सलाम ने पेश किया. उनका अंदाज-ए-कुर्बानी सबसे निराला था. उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे हजरत इस्माइल अलैह सलाम की कुर्बानी कर लोगों को पैगाम दिया कि अल्लाह की बंदगी हरहाल में पूरा करें. बकरीद सोमवार को मनाया जायेगा. उक्त बातें मदरसा जामिया शहबाजिया के हेड शिक्षक मुफ्ती फारूक आलम अशरफी ने कही. उन्होंने कहा कि अल्लाह ने हजरत इस्माइल अलैह सलाम की जगह पर जन्नत से भेजे गये दुम्बा को कुर्बान होने के लिए भेज दिया था. मदीना से ही दो इस्वी में कुर्बानी की शुरुआत हुई. कुर्बानी का उद्देश्य कुर्बानी का उद्देश्य है कि हर आदमी अपनी जान-माल व जायदाद व हर वह चीज जिसे वह बेहद पसंद करता है, उसे अल्लाह की राह में कुर्बानी करे. मुफ्ती मौलाना फारूक अशरफी ने बताया कि अल्लाह ने कुरान-ए-पाक में फरमाया है कि तुम्हारे द्वारा जानवरों को दी गयी कुर्बानी का मांस व उसका खून मेरी बारगाह में नहीं पहुंचता है, लेकिन सच्ची नीयत के साथ हजरत इब्राहिम अलैह सलाम की सुन्नत को अदा करनी चाहिए. बकरा बाजार में पठान सब पर भारी बकरीद में एक दिन शेष रह गया है. इसलिए बकरा की खरीदारी जोरों पर है. शनिवार को तातारपुर चौक स्थित बकरा बाजार में बड़ी संख्या में व्यापारी बकरा बिक्री करने पहुंचे थे. बकरा की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ लगी रही. सबसे ज्यादा वागरा नस्ल के पठान बकरा लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा. हर किसी की नजर पठान पर ही थी. कीमत 80 हजार रुपये था. बकरा के मालिक मो राशिद ने कहा कि वागरा नस्ल के पठान बकरा को तीन साल से पाल रहे हैं. इसका वजन 50 किलो से अधिक है. लोगों के बीच में रहना ही पसंद करता है. खाने में रसगुल्ला, अंडा, पनीर तक खाता है. हालांकि, पठान की कीमत सुन लोग जम नहीं रहे थे.
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