bhagalpur news. जमीन रजिस्ट्री के नये नियम 15 मई से होंगे लागू

बिहार में जमीन की रजिस्ट्री को लेकर राज्य सरकार द्वारा जारी नये दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भागलपुर जिला प्रशासन ने कमर कस ली है.

बिहार में जमीन की रजिस्ट्री को लेकर राज्य सरकार द्वारा जारी नये दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भागलपुर जिला प्रशासन ने कमर कस ली है. विभाग के निर्देशानुसार 24 अप्रैल को जिले के सभी अंचल अधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को गहन प्रशिक्षण दिया जा चुका है. यह 15 मई से लागू भी हो जायेगा. इस पहल का मुख्य उद्देश्य भूमि विवादों में कमी लाना और रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है. सरकार के नये आदेशों के मुताबिक अब जमीन की रजिस्ट्री के लिए विक्रेता के नाम पर स्पष्ट जमाबंदी होना अनिवार्य है. प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को कई बिंदुओं पर विशेष निर्देश दिये गये हैं. क्या है विशेष निर्देश पुश्तैनी जमीन का बंटवारा : पैतृक संपत्ति की बिक्री के लिए अब आपसी सहमति से बंटवारा या कानूनी वंशावली के आधार पर विक्रेता के नाम पर अलग जमाबंदी का होना आवश्यक है. वंशावली निर्माण : राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे वंशावली बनाने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनायें, ताकि रैयतों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े. दाखिल-खारिज में तेजी : लंबित दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के मामलों को जल्द निपटाने के निर्देश दिये गये हैं, ताकि जमीन मालिकों की अपनी जमाबंदी अपडेट हो सके. रजिस्ट्री कार्यालयों में सतर्कता प्रशिक्षण में यह स्पष्ट किया गया है कि अब बिना वैध जमाबंदी वाले दस्तावेजों की रजिस्ट्री नहीं की जायेगी. इससे उन मामलों पर रोक लगेगी, जहां एक ही जमीन को कई बार बेच दिया जाता था या विवादित जमीनों की हेराफेरी की जाती थी. माना जा रहा है कि इन सख्त नियमों और अधिकारियों के प्रशिक्षण से भविष्य में होने वाले भूमि विवादों में भारी कमी आयेगी. केवल वास्तविक मालिक ही जमीन बेच सकेंगे, जिससे खरीदारों के साथ धोखाधड़ी की संभावना न्यूनतम हो जायेगी. दाखिल-खारिज और जमाबंदी की प्रक्रिया सुदृढ़ होने से सरकारी रिकॉर्ड और धरातल की स्थिति में एकरूपता आयेगी. अदालतों में लंबित भूमि संबंधी मामलों के बोझ को कम करने में यह कदम मील का पत्थर साबित होगा. अधिकारियों को सख्त हिदायत उपनिबंधक महानिरीक्षक द्वारा समाहर्ता को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि यदि किसी भी अंचल में वंशावली या दाखिल-खारिज के कार्यों में कोताही बरती गयी, तो संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की जायेगी. 24 अप्रैल के इस प्रशिक्षण के बाद अब जिले भर के अंचलों में नये नियमों के तहत कार्य शुरू कर दिया गया है.

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By NISHI RANJAN THAKUR

NISHI RANJAN THAKUR is a contributor at Prabhat Khabar.

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