bhagalpur news. बिना बायलॉज के चल रहा एमबीए व एमसीए विभाग

टीएमबीयू के दो पाठ्यक्रम बिना बायलॉज के संचालित करने का मामला सामने आया है

टीएमबीयू के दो पाठ्यक्रम बिना बायलॉज के संचालित करने का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि एमबीए विभाग व एमसीए विभाग सालों से संचालित किया जा रहा है, लेकिन दोनों विभाग का बायलॉज ही नहीं है. इसका खुलासा उस समय सामने आया, जब एमबीए विभाग में किताब खरीद मामले को जांच कर रही उच्च स्तरीय कमेटी ने बायलॉज के बारे में संबंधित लोगों से पूछा, तो बताया गया नहीं है. इस बारे में एमसीए विभाग से पूछा गया, तो वहां से भी बताया गया कि बायलॉज नहीं है. कमेटी के एक सदस्य ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि उक्त दोनों विभाग में बायलॉज नहीं है. कहा कि बायलॉज नहीं रहने से जांच में दिक्कत आ सकती है. क्योंकि बायलॉज में ही विभाग के संचालन से संबंधित जरूरी जानकारी रहती है. ऐसे में बायलॉज नहीं मिलने पर सवाल उठने लगा है. हालांकि, विभाग के एक अधिकारी का कहना कि बायलॉज है, हो सकता है कि विवि में ही रखा हो. प्रभात नॉलेज छपरा विवि के पूर्व कुलपति प्रो फारूक अली ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान के संचालन के लिए बायलॉज होना महत्वपूर्ण है. बायलॉज (नियमावली) से ही संस्थान सुचारू रूप से संचालित किया जा सकता है. क्योंकि बायलॉज में संस्थान के संचालन को लेकर बिंदुवार नियम बनाये जाते हैं. उसी नियम का पालन करते हुए संस्थान संचालित किया जाता है. संस्थान के पास बायलॉज नहीं है, तो गंभीर बात है. ऐसे में संस्थान को नियमावली अविलंब बनाना चाहिए. किताब खरीद के मामले में विभाग जायेगी कमेटी एमबीए विभाग में खरीद की गयी पुस्तक की जांच करने जांच कमेटी जल्द ही एमबीए विभाग जा सकती है. कमेटी पुस्तक खरीदारी से संबंधित एक-एक बिंदुओं को खंगालेगी. इससे पहले शुक्रवार को जांच कमेटी ने पहली बैठक पीजी सांख्यिकी विभाग में की गयी थी. कमेटी के संयोजक प्रो निसार अहमद है. एमबीए विभाग के कर्मी के मानदेय बढ़ाने को लेकर कमेटी करेगी ऑडिट एमबीए विभाग के सलाहकार समिति की करीब एक सप्ताह पहले प्रभारी कुलपति प्रो विमलेंदु शेखर झा की अध्यक्षता में उनके वीसी आवासीय कार्यालय में बैठक हुई थी. इसमें विभाग के कर्मियों ने मानदेय बढ़ाने का आग्रह किया था. इस बाबत सलाहकार समिति ने तत्काल प्रभाव से तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है. इसमें सिंडिकेट सदस्य डॉ मृत्युंजय सिंह गंगा, डॉ गौरीशंकर डोकानिया व प्रो पवन सिन्हा शामिल हैं. कमेटी विभाग में नामांकन से लेकर कर्मियों तक होने वाले खर्च का ऑडिट करेगी. एक सदस्य ने कहा कि ऑडिट में देखा जायेगा कि नामांकन से विभाग को कितना राशि आता है. उस राशि से एक साल में कितना खर्च आता है. वर्तमान में विभाग के खाता में कितना राशि जमा है. तमाम चीजों को देखने के बाद ही कमेटी रिपोर्ट बनाकर विवि प्रशासन को सौंपेगी.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: ATUL KUMAR

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >