बिहपुर प्रखंड में बढ़ती महंगाई का असर अब पशुपालकों पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है. हाल के दिनों में चारे और पशु आहार की कीमतों में वृद्धि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. अभी गेहूं की फसल घर आने के साथ ही भूसा की कीमत प्रति क्विंटल एक हजार रुपये के पार पहुंच गया है. आने वाले तीन से चार महीनों में यही कीमत बढ़ कर 15 सौ से दो हजार रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकती है. भूसा के अलावा, हरे चारे और अन्य पशु आहार की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि देखी जा रही है. मक्के के हरे चारे का भाव 35 सौ से चार हजार रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, जो पहले की तुलना में काफी अधिक है. ऐसे में पशुपालन की लागत लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बन रहा है. सोनवर्षा के किसान सह पशुपालक पंकज कुमार और राकेश कुमार बताते हैं कि वर्तमान हालात में पशुपालन घाटे का सौदा बनता जा रहा है. एक ओर चारा महंगा हो गया है, वहीं दूसरी ओर दूध की कीमतों में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो रही है. स्थानीय स्तर पर गाय का दूध 40 से 45 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि भैंस का दूध 65 से 70 रुपये प्रति लीटर के बीच है. पशुपालकों का आरोप है कि डेयरी केंद्रों पर दूध का दाम इससे भी कम है, जिससे उनका लागत भी नहीं निकल पा रहा है. कई छोटे किसान पशुपालन से दूरी बनाने पर विचार कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही पशुपालकों को राहत देने के लिए ठोस कदम नहीं उठाये गये, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. सरकार की ओर से चारा अनुदान, उचित मूल्य पर पशु आहार उपलब्ध कराने और दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने जैसी योजनाओं की मांग तेज हो रही है. कुल मिलाकर महंगाई अब पशुपालकों के आंगन तक पहुंच चुकी है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है.
Bhagalpur news पशु आहार की कीमतों में वृद्धि से पशुपालक परेशान
बिहपुर प्रखंड में बढ़ती महंगाई का असर अब पशुपालकों पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है. हाल के दिनों में चारे और पशु आहार की कीमतों में वृद्धि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है.
