भागलपुर में गंगा नदी के बढ़े हुए जलस्तर का असर अब तटवर्ती सरकारी ठिकानों पर भी दिखने लगा है. गंगा किनारे खंजरपुर में स्थित 'भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण' (IWAI) के उप कार्यालय परिसर में बाढ़ का पानी तेजी से घुस गया है.
कई एकड़ में फैले प्राधिकरण के बड़े से परिसर में घुटनों (ठेहुनों) तक पानी भर गया है, जिससे पूरा इलाका किसी डूबे हुए टापू जैसा दिख रहा है. बाढ़ का पानी कार्यालय भवन की मुख्य सीढ़ियों तक आ गया है और अगर जलस्तर में ज़रा भी और बढ़ोतरी हुई, तो पानी सीधे सरकारी कमरों और रिकॉर्ड रूम में घुस जाएगा.
बाढ़ के बीच भी कर्तव्य पर अडिग: कर्मी कर रहे काम
यह स्थिति सरकारी कामकाज को कैसे प्रभावित कर रही है. इसके बावजूद कार्यालय के अफ़सरों और कर्मचारियों का ज़िम्मेदारी के प्रति समर्पण देखने लायक है. परिसर पूरी तरह पानी में डूबा होने के बाद भी अफ़सर और कर्मचारी न तो काम से पीछे हट रहे हैं और न ही ड्यूटी से गायब हैं.
कर्मचारी अपनी पैंट और जींस को ऊपर मोड़कर, जूते-चप्पल हाथ में लेकर घुटनों तक भरे गंदे पानी के बीच पैदल चलकर रोज़ाना कार्यालय पहुँच रहे हैं. इन मुश्किल हालातों में भी सभी कर्मचारी समय पर दफ्तर पहुँचकर विभागीय फाइलों का निपटारा कर रहे हैं और काम ख़त्म होने के बाद इसी जलभराव से होकर घर लौट रहे हैं.
खतरे की दस्तक: सीढ़ियों तक पहुंचा पानी, फाइलों पर मंडराया संकट
परिसर में मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि गंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण परिसर की स्थिति लगातार नाज़ुक बनी हुई है. कार्यालय की सीढ़ियों को पानी छू रहा है.
अगर जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी भी होती है, तो कंप्यूटर सिस्टम, ज़रूरी तकनीकी उपकरण और महत्वपूर्ण कागज़ातों को बचाने की गंभीर चुनौती खड़ी हो जाएगी. इन सरकारी फाइलों में न जाने कितने महत्वपूर्ण दस्तावेज और लोगों के रिकॉर्ड बंद हैं, जिनका बह जाना एक बड़ी त्रासदी होगी. हालांकि, इस खतरे के बीच भी प्राधिकरण के कर्मचारी लगातार चौकन्ने रहकर अपने कामों को अंजाम दे रहे हैं.