रेशमी शहर भागलपुर में गुड़हट्टा चौक से पटलबाबू रोड तक का सफर इन दिनों किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रह गया है. सुबह 8 बजे से लेकर रात 10 बजे तक करीब 500 मीटर का यह हिस्सा भीषण ट्रैफिक जाम की गिरफ्त में रहता है. गुरुवार को भी सड़क पर गाड़ियां इस कदर फंसी रहीं कि पहिए पूरी तरह थम गए. मोजाहिदपुर थाना, लोहिया पुल और डिक्सन मोड़ पुलिस शिविर की पुलिस मौके पर मुस्तैद रही, लेकिन बेतरतीब खड़ी निजी बसों और आड़े-तिरछे वाहनों के आगे प्रशासनिक अमला बेबस नजर आया.
आधे घंटे के जाम में ₹25 हजार का पेट्रोल-डीजल बर्बाद
ट्रैफिक जाम न केवल लोगों का कीमती समय छीन रहा है, बल्कि शहरवासियों की जेब पर भी भारी चोट कर रहा है:
- ईंधन की बर्बादी: अनुमान के मुताबिक, आधे घंटे के जाम में करीब 1000 वाहन फंसे रहे. यदि प्रति वाहन औसतन 25 रुपये का ईंधन सिर्फ खड़े-खड़े या रेंगते हुए जला, तो महज 30 मिनट में 25,000 रुपये का पेट्रोल-डीजल धुएं में उड़ गया.
- दिनभर का नुकसान: जब दिनभर में कई बार यही स्थिति बनती है, तो रोजाना लाखों रुपये के ईंधन का नुकसान और पर्यावरण में विषैला धुआं घुल रहा है.
किन वजहों से बन रहा है 'जाम का जंजाल'?
500 मीटर के इस दायरे में जाम लगने के मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
- भोलानाथ आरओबी निर्माण: वैकल्पिक मार्ग पर आरओबी का काम चलने से सारा ट्रैफिक इसी सड़क पर डायवर्ट हो गया है.
- कोयला डिपो में बस स्टैंड: रिक्शाडीह भेजे गए बस स्टैंड को दोबारा कोयला डिपो में शिफ्ट करने से दर्जनों बसें एक साथ लोहिया पुल पर पहुंच रही हैं.
- सवारी चढ़ाने-उतारने की होड़: बीच पुल पर बसों को आड़े-तिरछे खड़ा कर सवारियां बैठाई और उतारी जाती हैं.
- ई-रिक्शा और अवैध स्टैंड: ट्रैफिक पोस्ट के ठीक सामने ई-रिक्शा की लंबी कतारें और थाने के सामने अवैध ऑटो स्टैंड का संचालन.
- अतिक्रमण और संकरा रास्ता: लोहिया पुल के बीच में डिवाइडर होने से बसों को मोड़ने में दिक्कत और सड़क किनारे लगीं अस्थायी दुकानें.
जाम से जनजीवन बेहाल: 5 प्रमुख समस्याएं
- दफ्तर और स्कूल जाने वाले परेशान: महज 500 मीटर की दूरी तय करने में 30 से 40 मिनट लगने से लोग समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं.
- धूप में पसीना बहाते दोपहिया चालक: भीषण धूप और गर्मी के बीच बाइक व स्कूटी सवार जाम में फंसे रहने को मजबूर हैं.
- इमरजेंसी सेवाओं पर ब्रेक: जाम में एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाओं के फंसने का खतरा लगातार बना रहता है.
- गलियों में भी चक्काजाम: मुख्य सड़क से बचकर निकलने के चक्कर में जब वाहन तंग गलियों में घुसते हैं, तो कॉलोनियों के रास्ते भी पूरी तरह ब्लॉक हो जाते हैं.
- व्यापार और स्वास्थ्य पर असर: दुकानों के सामने जाम रहने से ग्राहकों का आना कम हो गया है और लगातार क्लच-ब्रेक के इस्तेमाल से गाड़ियों के मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया है.
