नवगछिया के सरकारी अस्पताल में महिला चिकित्सक के बिना ANM करा रहीं प्रसव

Government Hospital Doctor Shortage: नवगछिया अनुमंडल के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के अधिकांश पद वर्षों से खाली पड़े हैं, जिससे ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ गई है.

भागलपुर (गोपालपुर) से विपिन ठाकुर की रिपोर्ट

Government Hospital Doctor Shortage: भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण इलाके इस वक्त बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की मार झेल रहे हैं. अनुमंडल के अधिकांश सरकारी अस्पताल इन दिनों डॉक्टरों की भारी कमी (Doctor Shortage) से जूझ रहे हैं. स्थिति यह है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में विशेषज्ञ चिकित्सकों के दर्जनों पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं. इसके कारण सुदूर देहातों से आने वाले गरीब मरीजों को साधारण बीमारियों के परामर्श के लिए भी भागलपुर के मायागंज अस्पताल या अन्य निजी क्लीनिकों की ओर दौड़ लगानी पड़ रही है. गोपालपुर, इस्माईलपुर और रंगरा चौक सीएचसी की ग्राउंड रिपोर्ट प्रशासनिक दावों की पोल खोलती नजर आ रही है.

लेडी डॉक्टर नदारद; प्रशिक्षित ANM के भरोसे प्रसव कार्य

  • विशेषज्ञों का घोर अभाव: अस्पतालों में स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ (Gynecologist), शिशु रोग विशेषज्ञ (Pediatrician), हड्डी रोग विशेषज्ञ (Orthopedic) और सबसे महत्वपूर्ण एनेस्थेटिस्ट (Anesthetist) के पद खाली हैं.
  • ANM के भरोसे प्रसव: सबसे विकट स्थिति प्रसव (डिलीवरी) विंग की है. महिला डॉक्टरों की घोर किल्लत के कारण ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में प्रशिक्षित एएनएम (ANM) और सामान्य महिला स्वास्थ्यकर्मी ही किसी तरह सामान्य प्रसव कराने को मजबूर हैं.
  • रेफरल का बढ़ा बोझ: यदि प्रसव के दौरान थोड़ी भी जटिलता (Critical Case) सामने आती है, तो डॉक्टर न होने के कारण मरीज को तुरंत भागलपुर रेफर कर दिया जाता है. रास्ते में लगने वाले समय के कारण जच्चा-बच्चा दोनों की जान पर जोखिम बना रहता है.
  • निजी क्लीनिकों की चांदी: सरकारी व्यवस्था फेल होने के कारण गरीब ग्रामीणों को अपनी जमीन या गहने गिरवी रखकर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां भारी भरकम फीस वसूली जा रही है.

भवनों पर खर्च हुए करोड़ रुपये, पर चिकित्सक गायब

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार बुनियादी ढांचे के नाम पर भव्य अस्पताल भवनों के निर्माण और संसाधनों की खरीद पर हर साल करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है. लेकिन जब तक इन भवनों में मरीजों को देखने के लिए डॉक्टर ही नहीं बैठेंगे, तब तक इस कंक्रीट के ढांचे का आम जनता के लिए कोई औचित्य नहीं है.

सच्चाई यह भी है कि विभाग द्वारा कुछ जगहों पर कागजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों को पदस्थापित (Post) तो किया गया है, लेकिन वे योगदान (जॉइनिंग) देने के बाद से ही ड्यूटी से लगातार नदारद रहते हैं, जिससे मरीजों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है.

Government Hospital Doctor Shortage: मुख्य समस्याएं और जनमानस की मांगें

मुख्य समस्याएं (Issues)जनता की प्रमुख मांगें (Demands)
• विशेषज्ञ डॉक्टरों (गाइनेकोलॉजिस्ट/शिशु रोग) के पद रिक्त.• रिक्त पड़े सभी पदों पर अविलंब नियमित बहाली हो.
• मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएं और ओपीडी बुरी तरह प्रभावित.• प्रत्येक CHC में महिला चिकित्सक की 24 घंटे तैनाती हो.
• सामान्य केसों में भी रेफरल की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि.• ग्रामीण अस्पतालों में आपातकालीन (Emergency) सेवाएं सुदृढ़ हों.

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भागलपुर जिले के कुछ चुनिंदा ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की कमी की बात सही है. इसकी पूरी रिपोर्ट और रिक्तियों की सूची राज्य स्वास्थ्य विभाग, पटना को भेजी जा चुकी है. मुख्यालय स्तर पर डॉक्टरों की चरणबद्ध बहाली और पदस्थापन की प्रक्रिया वर्तमान में गतिशील है. स्थानीय स्तर पर जहां भी अत्यधिक आवश्यकता है, वहां जिला स्तर से डॉक्टरों की अस्थाई प्रतिनियुक्ति (Deputation) करने पर विचार किया जा रहा है. मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना हमारी प्राथमिकता है.” — डॉ. अशोक कुमार, सिविल सर्जन, भागलपुर

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Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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