सैदपुर दुर्गा मंदिर पर मंडराया गंगा का खतरा: कटाव निरोधी कार्य न होने से ग्रामीण चिंतित

भागलपुर के ऐतिहासिक सैदपुर दुर्गा मंदिर पर एक बार फिर गंगा नदी का खतरा मंडराने लगा है. गंगा के जलस्तर में हो रही वृद्धि के बीच कटाव निरोधी कार्य में देरी से ग्रामीण और मंदिर समिति चिंतित हैं. पिछले साल आपातकालीन उपायों से मंदिर की जान बची थी, लेकिन इस बार स्थिति गंभीर बनी हुई है.

भागलपुर जिले के गोपालपुर प्रखंड अंतर्गत ऐतिहासिक सैदपुर दुर्गा मंदिर पर एक बार फिर गंगा नदी का खतरा मंडराने लगा है. गंगा के जलस्तर में हो रही लगातार वृद्धि के बीच इस संवेदनशील स्थल पर अब तक स्थायी कटाव निरोधी कार्य (Anti-Erosion Work) शुरू नहीं कराए जाने से स्थानीय ग्रामीणों और मंदिर समिति में गहरी चिंता व्याप्त हो गई है.

पिछले साल बांस पाइलिंग से बची थी लाज, इस बार तैयारी अधूरी

स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने बताया कि पिछले साल जब गंगा की लहरें मंदिर के बिल्कुल करीब पहुंच गई थीं, तब प्रशासन ने तत्परता दिखाई थी:

  • आपातकालीन कार्य: तत्कालीन डीएम के आदेश पर ग्रामीण कार्य विभाग ने युद्धस्तर पर बांस पाइलिंग (बंबू पाइलिंग) और एनसी (नायलॉन क्रेट) के जरिए फ्लड फाइटिंग का काम कराया था, जिससे मंदिर को तात्कालिक सुरक्षा मिली थी.
  • सौतेला व्यवहार: ग्रामीणों का आरोप है कि इस्माईलपुर-बिंद टोली तटबंध के विभिन्न संवेदनशील हिस्सों में तो कटाव निरोधी कार्य तेजी से कराया जा रहा है, लेकिन ऐतिहासिक सैदपुर दुर्गा मंदिर के समीप के इस बेहद संवेदनशील हिस्से को इस बार पूरी तरह उपेक्षित छोड़ दिया गया है.

5 करोड़ की लागत से बना है आस्था का यह बड़ा केंद्र

सैदपुर का यह दुर्गा मंदिर केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि पूरे अंग क्षेत्र की अटूट आस्था का प्रतीक है. मंदिर की भव्यता और महत्ता को रेखांकित करते हुए मंदिर प्रबंधन ने चिंता जताई है:

"इस भव्य मंदिर का निर्माण सैदपुर और आसपास के ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से 5 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से किया गया है. शारदीय नवरात्र और दुर्गा पूजा के दौरान यहां पूरे बिहार के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. ऐसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल की सुरक्षा के लिए जल संसाधन विभाग के वरीय अधिकारियों को अविलंब तकनीकी सर्वे कराकर स्थायी बोल्डर क्रेटिंग या जियो बैग का कार्य शुरू कराना चाहिए." — महेश कुंवर, अध्यक्ष, सैदपुर दुर्गा मंदिर समिति

पंचायत प्रतिनिधियों ने बांध तो बांधा, पर 'सीपेज' का खतरा बरकरार

राहत की बात यह है कि इस वर्ष सैदपुर के स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने सक्रियता दिखाते हुए 'ब्रह्मोत्तर बांध' की समय रहते मरम्मत करवा दी है और मिट्टी डालकर बांध को काफी मजबूत बना दिया है. इसके बावजूद खतरा पूरी तरह टला नहीं है. ग्रामीणों और तकनीकी जानकारों का कहना है कि गंगा प्रसाद धार में जलस्तर बढ़ने के कारण 'सिपेज' (पानी का रिसाव) होने और भारी बारिश के पानी के जमा होने से मंदिर के ठीक पीछे बने बाढ़ के गहरे गड्ढों में पानी भरने की पूरी संभावना है. यदि ऐसा हुआ, तो अंदरूनी कटाव से मंदिर की नींव को नुकसान पहुंच सकता है.

स्थानीय निवासियों ने भागलपुर जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता से मांग की है कि बाढ़ का पानी पूरी तरह उफान पर आने से पहले यहां सुरक्षात्मक कार्य शुरू करा दिए जाएं.


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