नवगछिया अनुमंडल क्षेत्र से होकर गुजरने वाली गंगा और कोसी नदियों के उफान में अब आंशिक ठहराव और गिरावट देखने को मिल रही है. शुक्रवार 18 सितंबर को सुबह दर्ज आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र के चारों प्रमुख गेज स्थलों पर दोनों नदियों के जलस्तर में कमी आई है.
हालांकि जलस्तर घटने के बावजूद दोनों नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे तटवर्ती इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की धड़कनें अब भी बढ़ी हुई हैं. राहत की बात यह है कि जल संसाधन विभाग ने सभी तटबंधों को पूरी तरह सुरक्षित बताया है.
12 घंटे में 3 से 10 सेंटीमीटर तक उतरा पानी
शुक्रवार सुबह छह बजे बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल द्वारा जारी ताजा गेज रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 12 घंटों के दौरान नदियों के जलस्तर में क्रमिक गिरावट दर्ज की गई है:
- इस्माईलपुर-बिंदटोली: गंगा नदी का जलस्तर 32.56 मीटर दर्ज किया गया, जिसमें पिछले 12 घंटे में 7 सेंटीमीटर की कमी आई है. इसके बावजूद नदी यहां लाल निशान से 96 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है.
- राघोपुर: गंगा का जलस्तर 33.71 मीटर रिकॉर्ड हुआ. यहां पिछले 12 घंटों में 10 सेंटीमीटर की कमी आई है, लेकिन गंगा अभी भी खतरे के निशान से 3 सेंटीमीटर ऊपर बनी हुई है.
- मदरौनी: कोसी नदी का जलस्तर 31.58 मीटर रहा, जिसमें 5 सेंटीमीटर की गिरावट देखी गई. कोसी यहां खतरे के लाल निशान से 10 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है.
- जेबी चोरहर: कोसी का जलस्तर 31.77 मीटर मापा गया, जहां 12 घंटे में 3 सेंटीमीटर की कमी आई है और पानी खतरे के निशान के बिल्कुल समानांतर बना हुआ है.
तटबंध के निचले हिस्से (टो-भाग) को छू रहा है पानी
जलस्तर में कमी आने के बावजूद बाढ़ का खतरा पूरी तरह टला नहीं है. चारों प्रमुख स्थलों—इस्माईलपुर, राघोपुर, मदरौनी और चोरहर में उफनती नदियों की धारा सुरक्षात्मक तटबंधों के टो-भाग (निचले हिस्से) को लगातार स्पर्श कर रही है.
पानी के सीधे दबाव और बहाव के कारण तटबंधों के स्लोप पर दबाव बना हुआ है, जिससे स्थानीय आबादी में संभावित कटाव को लेकर चिंता बनी हुई है.
तटबंध सुरक्षित, 24 घंटे गश्त कर रहे हैं इंजीनियर
बाढ़ नियंत्रण एवं जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीम ने स्पष्ट किया है कि सभी प्रमुख तटबंध पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में हैं.
विभाग की ओर से संवेदनशील स्परों और बांध के हिस्सों पर फ्लड फाइटिंग सामग्री, बालू भरी बोरियां और बोल्डर पहले से डंप रखे गए हैं. अभियंताओं की टीम दिन-रात तटबंधों की निगरानी कर रही है ताकि कटाव या रिसाव की किसी भी आकस्मिक परिस्थिति से तुरंत निपटा जा सके.
