गंगा में बढ़ती डूबने की घटनाओं से बढ़ी चिंता, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की उठी मांग

Ganga Safety Concern : धार्मिक नगरी सुलतानगंज में गंगा स्नान के दौरान लगातार सामने आ रही डूबने की घटनाएं चिंता का विषय बनती जा रही हैं. ताजा मामले में जमुई के एक 80 वर्षीय बुजुर्ग गंगा में स्नान करते समय लापता हो गए. घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों ने घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा एसडीआरएफ की त्वरित तैनाती की मांग उठाई है.

सुलतानगंज, भागलपुर से रिपोर्ट

Bhagalpur News : विश्व प्रसिद्ध बाबा अजगैबीनाथ धाम की धार्मिक नगरी सुलतानगंज में गंगा स्नान के दौरान बढ़ रही दुर्घटनाओं ने श्रद्धालुओं और स्थानीय प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है. पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी के अभाव में बीते दो महीनों के दौरान आधा दर्जन से अधिक लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है या वे लापता हो गए हैं.

रविवार को घटी एक और घटना ने घाटों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

स्नान के दौरान गहरे पानी में डूबे बुजुर्ग

जानकारी के अनुसार जमुई जिले के लक्ष्मीपुर थाना क्षेत्र स्थित दिग्घी बरबनिया गांव निवासी 80 वर्षीय विदेशी यादव अपने परिजनों के साथ एक बुजुर्ग के अंतिम संस्कार में शामिल होने सुलतानगंज आए थे.अजगैबीनाथ गंगा घाट पर स्नान के दौरान अचानक उनका पैर फिसल गया और वह तेज बहाव के साथ गहरे पानी में चले गए. आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी. घटना के बाद से उनकी तलाश जारी है.

एसडीआरएफ की देरी पर परिजनों का आरोप

घटना के बाद परिजनों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि सूचना देने के लगभग दो घंटे बाद तक एसडीआरएफ की टीम घटनास्थल पर नहीं पहुंची.परिजनों का कहना है कि यदि समय पर राहत एवं बचाव दल पहुंच जाता तो शायद स्थिति कुछ और हो सकती थी. उन्होंने घाटों पर स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है.

घाटों पर सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की जरूरत

स्थानीय लोगों का कहना है कि सुलतानगंज के विभिन्न घाटों पर हर वर्ष लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. विशेष रूप से श्रावणी मेला, सोमवती अमावस्या, पूर्णिमा और अन्य धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है.इसके बावजूद कई संवेदनशील घाटों पर पर्याप्त बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और प्रशिक्षित गोताखोरों की व्यवस्था नहीं दिखाई देती.

विशेषज्ञों ने सुझाये सुरक्षा के उपाय

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि गंगा के खतरनाक एवं गहरे हिस्सों को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया जाना चाहिए. साथ ही प्रमुख घाटों पर चेतावनी संकेतक बोर्ड, लाइफ जैकेट, सुरक्षा रस्सियां और प्रशिक्षित गोताखोरों की नियमित तैनाती सुनिश्चित की जानी चाहिए.इसके अलावा एसडीआरएफ और आपदा राहत दल को 24 घंटे अलर्ट मोड में रखने की भी मांग उठ रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत कार्य शुरू किया जा सके.

श्रावणी मेले से पहले प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

कुछ ही दिनों बाद श्रावणी मेला शुरू होने वाला है, जिसमें देशभर से लाखों कांवरिये और श्रद्धालु सुलतानगंज पहुंचेंगे. ऐसे में गंगा घाटों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है.स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि अभी से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में और भी दुखद घटनाएं सामने आ सकती हैं.

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By Amit kumar sinh

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