सुलतानगंज: 'हे गंगा मइया, अबै लौटि जा; भूल-चूक माफ करो'—आंचल फैलाकर रो पड़ीं 60 वर्षीय मनोरमा; छतों पर कट रही रातें

भागलपुर के सुलतानगंज में गंगा का विकराल रूप जारी है, जिसने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. बाढ़ के पानी से घर जलमग्न हो गए हैं, चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं और लोग सुरक्षित छतों पर रातें गुजारने को मजबूर हैं.

भागलपुर जिले के सुलतानगंज प्रखंड में उफनती गंगा का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है. घर-आंगन में पानी, बुझे हुए चूल्हे और पेट में भूख लिए छत पर रात काटते परिवारों की निगाहें अब केवल आसमान और गंगा की घटती-बढ़ती लहरों पर टिकी हैं.

बाढ़ ने यहां आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है. जहरीले जीव-जंतुओं के खौफ और जलमग्न रास्तों के बीच बेबस लोग छतों और ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं. इसी त्रासदी के बीच सुरक्षित स्थान पर बैठीं 60 वर्षीया मनोरमा देवी दोनों हाथ जोड़कर और आंचल फैलाकर गंगा की ओर मुखातिब होते हुए भर्राए गले से कह उठती हैं—"हे गंगा मइया, अबै लौटि जा... भूल-चूक माफ करो." उनकी यह मार्मिक पुकार आज पूरे सुलतानगंज के बाढ़ पीड़ितों का सामूहिक दर्द बन चुकी है.

घर में अनाज नहीं, मजदूरी ठप होने से चूल्हा जलना मुश्किल

बाढ़ प्रभावित ग्रामीण इलाकों में पानी छाती तक पहुंच चुका है. रोज कमाने-खाने वाले दिहाड़ी मजदूरों के सामने दो वक्त की रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है.

  • मजदूरी बंद होने के कारण परिवारों के पास राशन खरीदने के लिए पैसे नहीं बचे हैं.
  • खेतों में लगी खरीफ फसलें पूरी तरह डूबकर नष्ट हो चुकी हैं.
  • मवेशियों को लेकर ऊंचे स्थानों पर पहुंचे पशुपालकों के सामने सूखे चारे का विकट संकट है; घरों में रखा भूसा और चोकर भीगकर सड़ चुका है, जिसके चलते लोग महंगे दामों पर चारा खरीदने को विवश हैं.

नगर परिषद के वार्ड 7 से 11 में जलभराव, वार्ड 9 की स्थिति गंभीर

गंगा के लगातार बढ़ते दबाव के कारण सुलतानगंज नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 7, 8, 9, 10 और 11 सहित दक्षिणी हिस्से के कई मोहल्ले जलमग्न हो चुके हैं.

वार्ड 9 में हालात सबसे ज्यादा नाजुक बताए जा रहे हैं, जहां घरों के भीतर कई फीट तक पानी बह रहा है. इसके अतिरिक्त प्रखंड की आधा दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों के दर्जनों गांव मुख्य भूभाग से कट गए हैं. भाजपा जिला प्रवक्ता सह वार्ड 3 के पार्षद संजय कुमार चौधरी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अंचलाधिकारी (सीओ) से बाढ़ग्रस्त वार्डों व पंचायतों में अविलंब सरकारी सामुदायिक रसोई चालू करने, प्लास्टिक शीट, सूखा राशन, नाव और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं बहाल करने की पुरजोर मांग की है.

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र | Prabhat Khabar Network

45 विद्यालयों में घुसा बाढ़ का पानी, पढ़ाई पूरी तरह बंद

बाढ़ का सीधा असर बच्चों की स्कूली शिक्षा पर पड़ा है. बुधवार को चार और सरकारी स्कूलों में पानी भरने के बाद प्रखंड में बाढ़ प्रभावित विद्यालयों की कुल संख्या बढ़कर 45 हो गई है.

  • नए प्रभावित विद्यालय: उच्च माध्यमिक विद्यालय अकबरनगर, प्राथमिक विद्यालय स्थनडीह, प्राथमिक विद्यालय बिसौनी दियारा और प्राथमिक विद्यालय बैकटपुर.
  • विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए इन सभी 45 विद्यालयों में पठन-पाठन तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है.
  • प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) तनु कुमारी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित विद्यालयों के शिक्षकों को नजदीकी सुरक्षित विद्यालयों में प्रतिनियुक्त करने का आधिकारिक आदेश जारी किया है.

अंधेरा घिरते ही गहराता है डर, राहत का इंतजार

शाम ढलते ही तटबंधों और मुख्य सड़कों के किनारे तंबू ताने बैठे परिवारों की चिंताएं बढ़ जाती हैं. महिलाएं बचे हुए राशन का हिसाब लगाती हैं और पुरुष मवेशियों के चारे व परिजनों की सुरक्षा को लेकर रतजगा करते हैं. सुलतानगंज में बाढ़ अब केवल एक आपदा नहीं, बल्कि भूख, बेघर होने और अनिश्चित भविष्य की दास्तान बन चुकी है.

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By Shubhanka Kumar

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