भागलपुर जिले के सुलतानगंज स्थित प्रखंड कृषि कार्यालय परिसर में गुरुवार को एक दिवसीय 'खरीफ किसान गोष्ठी' का आयोजन किया गया.
कृषि विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी में प्रखंड भर से आए प्रगतिशील किसानों को विभागीय कल्याणकारी योजनाओं, रासायनिक खाद वितरण की नई व्यवस्था तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती के लाभों से अवगत कराया गया. कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने एक स्वर में किसानों से परंपरागत खेती के ढर्रे को बदलकर आधुनिक बाजार की मांग के अनुसार फसल विविधीकरण (क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन) अपनाने का आह्वान किया.
पारंपरिक फसलों के साथ नई नकदी फसलों को बढ़ावा: बीएओ सत्यम राज
गोष्ठी की शुरुआत किसानों को खाद बिक्री की पारदर्शी व नई प्रणाली से अवगत कराने के साथ हुई, ताकि किसानों को उर्वरक खरीद में किसी प्रकार की परेशानी न हो.
प्रखंड कृषि पदाधिकारी (बीएओ) सत्यम राज ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि केवल धान और गेहूं के चक्र में बंधे रहने से खेती की लागत बढ़ रही है और मुनाफा सीमित हो रहा है. उन्होंने किसानों से दलहन, तिलहन और अन्य उच्च मूल्य वाली नकदी फसलों को अपनाने का आग्रह किया. बीएओ ने स्पष्ट किया कि फसल विविधीकरण अपनाने से मौसम जनित जोखिम कम होता है और किसानों की आय में उल्लेखनीय इजाफा होता है.
बाजार की मांग को प्राथमिकता दें किसान: आत्मा उप परियोजना निदेशक
'आत्मा' (ATMA), भागलपुर के उप परियोजना निदेशक प्रभात सिंह ने किसानों को व्यावसायिक खेती की बारीकियां समझाईं.
उन्होंने कहा कि किसानों को केवल पैदावार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बाजार की नब्ज पहचानकर ऐसी उपज तैयार करनी चाहिए जिसकी मांग अधिक और मूल्य बेहतर हो. उन्होंने रासायनिक खादों पर निर्भरता कम कर जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की, जिससे उत्पाद की गुणवत्ता सुधरे और उसकी सीधी व बेहतर मार्केटिंग हो सके. गोष्ठी में सफल किसानों की सफलता की कहानियां (केस स्टडीज) भी साझा की गईं.
बीएयू सबौर के वैज्ञानिकों ने दी मृदा स्वास्थ्य सुधारने की सीख
बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर से पहुंचे कृषि वैज्ञानिकों ने मिट्टी की सेहत को खेती का आधार बताया.
- नियमित मिट्टी जांच: वैज्ञानिकों ने बुआई से पहले खेत की मिट्टी की जांच कराने और सॉइल हेल्थ कार्ड की सिफारिशों के अनुसार ही पोषक तत्व डालने पर जोर दिया.
- संतुलित उर्वरक प्रयोग: अंधाधुंध रासायनिक खादों के उपयोग से मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति पर चिंता जताई गई और संतुलित खाद प्रबंधन का सुझाव दिया गया.
- जल व संसाधन संरक्षण: प्राकृतिक संसाधनों और भूजल के विवेकपूर्ण उपयोग की सलाह दी गई.
संगोष्ठी में एबीएफ (ABF) तथा कृषि विभाग के अन्य क्षेत्रीय कर्मियों ने किसानों को सरकारी अनुदान, बीज वितरण और आधुनिक कृषि यंत्रों से संबंधित योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी.
