Bhagalpur News. इकलौते कर्मी की सेवानिवृत्त के साथ बंद हो गया जिला कोटि नियंत्रण कार्यालय, अब एमएसएमई निदेशालय करेगा काम

जिला कोटि नियंत्रण कार्यालय बंद.

– उत्पाद की गुणवत्ता को सुनिश्चित करता था विभाग, 60 के दशक में भागलपुर में शुरू हुआ था कार्यालय63 साल बाद इकलौते कर्मी की सेवानिवृत्त के साथ ही जिला उद्योग केंद्र में स्थित जिला कोटि नियंत्रण कार्यालय बंद हो गया. कार्यालय उत्पाद की गुणवत्ता की जांच करने का काम करता था. पहले यह कार्यालय कंबाइंड बिल्डिंग में संचालित था, फिर जिला उद्योग केंद्र में शिफ्ट कर दिया गया और अब एमएसएमई निदेशालय में काम होगा.

शनिवार 31 जनवरी को जिला कोटि नियंत्रण कार्यालय का इकलौता कर्मचारी मनोज शेखर सिन्हा सेवानिवृत्त हो गये. उन्होंने बताया कि 15 साल पहले कंबाइंड बिल्डिंग से जिला उद्योग केंद्र में शिफ्ट किया गया. कार्यालय में अब दूसरा कोई कर्मचारी बचा ही नहीं, जिससे अब कार्यालय का अस्तित्व भी खत्म हो गया.

क्या है कोटि नियंत्रण कार्यालय

जिला कोटि नियंत्रण कार्यालय से उद्योगों में तैयार सामान की गुणवत्ता की जांच की जाती थी. उत्पाद को क्यूएम मार्क दिया जाता था. यह मार्क उत्पाद की क्वालिटी की पुष्टि करता था. इससे संबंधित सर्टिफिकेट उद्यमियों को इसी विभाग से दिया जाता था. महज 200 रुपये के शुल्क में यह मार्क तीन वर्षों के लिए दिया जाता था. अविभाजित बिहार में छोटा नागपुर, पटना, मुजफ्फरपुर व भागलपुर में इसका कार्यालय था. झारखंड अलग होने के बाद बिहार में तीन कार्यालय रह गये. यह मार्क उपभोक्ताओं के बीच विश्वसनीय था.

इसलिए कम होती गयी महत्ता

स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत फूड विभाग से खाने-पीने के उत्पाद को सर्टिफिकेट मिलता है. एग मार्क, आइएसआइ मार्क और बार कोड जैसे क्वालिटी कंट्रोल के मार्क उपलब्ध होने से लोग कोटि नियंत्रण कार्यालय से मार्क नहीं लेते हैं. कोटि नियंत्रण कार्यालय से मार्क लेने की प्रक्रिया भी लंबी थी. नतीजतन आवेदन आने की रफ्तार घटती चली गयी और फिर आना ही बंद हो गया. क्वालिटी कंट्रोल मार्क देने के लिए भागलपुर में 1960 के दशक में कोटि नियंत्रण कार्यालय खोला गया था. इसे कंबाइंड बिल्डिंग में संचालित किया जाता था. इसमें एक सहायक निदेशक, तीन चतुर्थवर्गीय कर्मचारी, तीन इंस्पेक्टर व दो तृतीय वर्गीय कर्मचारी का पद आज भी सृजित है. वर्तमान में इसके सहायक निदेशक का प्रभार जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक के पास है.

कोट

एक अनुभवी कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के बाद दूसरे की बहाली नहीं की गयी है. ऐसे में सारी जिम्मेदारी मेरे ही ऊपर है. किसी की क्वालिटी की जांच के लिए टेक्निकल डिपार्टमेंट हाेता है, जो अब एमएसएमई निदेशालय के तहत आ गया है. भविष्य में कर्मचारी के बहाल होने की उम्मीद है.खुशबू कुमारी, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र

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By KALI KINKER MISHRA

KALI KINKER MISHRA is a contributor at Prabhat Khabar.

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