देवघर-पशुपतिनाथ शिव कॉरिडोर की पहल, भारत-नेपाल के दो शिवधामों को जोड़ने की तैयारी

नेपाल के मुख्यमंत्री कृष्ण प्रसाद यादव ने देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम और नेपाल के पशुपतिनाथ धाम को धार्मिक पर्यटन के माध्यम से जोड़ने की पहल की है. अयोध्या-जनकपुर कॉरिडोर की तर्ज पर इस प्रस्ताव पर भारत सरकार से बातचीत की जाएगी.

देवघर : सुलतानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा के तट से शनिवार को सिर्फ 17 श्रद्धालुओं का जत्था बाबाधाम के लिए रवाना नहीं हुआ. इस यात्रा के साथ भारत और नेपाल के दो प्रमुख शिवधामों को जोड़ने की एक नई धार्मिक पर्यटन पहल की चर्चा भी शुरू हुई.

नेपाल के मधेश प्रांत के मुख्यमंत्री कृष्ण प्रसाद यादव ने देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम और नेपाल के पशुपतिनाथ धाम को धार्मिक पर्यटन के माध्यम से जोड़ने की पहल की बात कही. उन्होंने कहा कि अयोध्या-जनकपुर और लुंबिनी-गौतम बुद्ध कॉरिडोर की तर्ज पर इस प्रस्ताव को लेकर भारत सरकार से बातचीत की जायेगी.

विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला के बीच जनकपुरधाम से पहुंचे मुख्यमंत्री कृष्ण प्रसाद यादव, कृषि सह भू-राजस्व मंत्री श्याम पटेल समेत 17 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सुलतानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान किया और गंगाजल भरा. इसके बाद सभी बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर के लिए रवाना हुए.

इस दौरान ‘देवघर-पशुपतिनाथ शिव कॉरिडोर’ की संभावनाओं पर भारत और नेपाल के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन संबंधों को लेकर चर्चा हुई.

दो देश, दो शिवधाम और एक आस्था का रास्ता

नेपाल के मुख्यमंत्री कृष्ण प्रसाद यादव ने कहा कि देवघर और पशुपतिनाथ धाम को धार्मिक पर्यटन के माध्यम से जोड़ने से भारत और नेपाल के श्रद्धालुओं को दोनों प्रमुख शिवधामों की यात्रा का अवसर मिलेगा.

उन्होंने कहा कि इससे सिर्फ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा नहीं मिलेगा, बल्कि भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्तों को भी नई मजबूती मिलेगी.

मुख्यमंत्री के मुताबिक भारत और नेपाल के संबंध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं हैं. दोनों देशों के लोगों के बीच आस्था, संस्कृति और परंपराओं का गहरा जुड़ाव है. ऐसे में दोनों देशों के प्रमुख शिवधामों को जोड़ने वाला धार्मिक पर्यटन मार्ग इस रिश्ते को नई पहचान दे सकता है.

सुलतानगंज से देवघर, फिर पशुपतिनाथ तक की परिकल्पना

फिलहाल यह पहल चर्चा और प्रस्ताव के स्तर पर है, लेकिन सुलतानगंज से इसकी चर्चा शुरू होना अपने आप में महत्वपूर्ण है. सुलतानगंज से गंगाजल लेकर कांवरिये बाबा बैद्यनाथ धाम तक जाते हैं. दूसरी ओर नेपाल का पशुपतिनाथ धाम भगवान शिव के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है.

यदि भविष्य में दोनों तीर्थस्थलों को धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस पहल होती है, तो अजगैवीनाथ धाम, बाबा बैद्यनाथ धाम और बाबा पशुपतिनाथ धाम को जोड़कर एक बड़ा धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित किया जा सकता है.

इससे दोनों देशों के श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने के साथ होटल, परिवहन, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प और दूसरे पर्यटन आधारित कारोबार को भी लाभ मिलने की संभावना है.

अयोध्या-जनकपुर और लुंबिनी कॉरिडोर का दिया उदाहरण

मुख्यमंत्री कृष्ण प्रसाद यादव ने इस प्रस्ताव को अयोध्या-जनकपुर और लुंबिनी-गौतम बुद्ध कॉरिडोर की तर्ज पर आगे बढ़ाने की बात कही.

उनका कहना था कि भारत और नेपाल के बीच धार्मिक पर्यटन के माध्यम से लोगों की आवाजाही और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और मजबूत किया जा सकता है. इसी सोच के तहत देवघर और पशुपतिनाथ को जोड़ने की संभावना पर भारत सरकार से बातचीत की जायेगी.

हालांकि, इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों के स्तर पर विस्तृत चर्चा, मार्ग, परिवहन, पर्यटन सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं पर निर्णय लेना होगा.

सुलतानगंज में नेपाली प्रतिनिधिमंडल का स्वागत

देवघर रवाना होने से पहले नमामि गंगे घाट स्थित अशोका गार्डन में जनसंसद के संरक्षक अजीत कुमार ने नेपाल के मुख्यमंत्री और प्रतिनिधिमंडल का फूल-माला और अंगवस्त्र देकर स्वागत किया.

इस दौरान प्रस्तावित शिव कॉरिडोर की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई. अजीत कुमार ने कहा कि बिहार और नेपाल को धार्मिक पर्यटन के माध्यम से जोड़ने की पहल दोनों क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है.

उन्होंने कहा कि अजगैवीनाथ धाम से बाबा बैद्यनाथ और आगे बाबा पशुपतिनाथ तक धार्मिक पर्यटन का मार्ग विकसित होने से श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ेगी. साथ ही दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध और मजबूत होंगे.

Deoghar Pashupatinath Shiv Corridor: श्रावणी मेले की व्यवस्था देखकर प्रभावित हुए नेपाली मुख्यमंत्री

सुलतानगंज पहुंचने पर नेपाल के मुख्यमंत्री ने श्रावणी मेला में श्रद्धालुओं के लिए की गयी व्यवस्थाओं की भी सराहना की.

उन्होंने कहा कि लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने के बावजूद प्रशासन की तैयारियां सराहनीय हैं. उन्होंने इसके लिए बिहार सरकार को धन्यवाद दिया और भविष्य में व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने की उम्मीद जतायी.

शनिवार को उत्तरवाहिनी गंगा से भरे जलकलश के साथ नेपाली प्रतिनिधिमंडल बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना हो गया. लेकिन उनके साथ शुरू हुई देवघर से पशुपतिनाथ तक ‘शिव कॉरिडोर’ की चर्चा अब भारत-नेपाल के धार्मिक और सांस्कृतिक रिश्तों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है.

मौके पर अशोक यादव, विभूति कुमार विकल, राहुल कुमार सहित अन्य लोग मौजूद थे.

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By शुभंकर

शुभंकर,करियर की शुरुआत दिल्ली के एक पाक्षिक पत्रिका से किया. राष्ट्रीय सहारा के बाद वर्ष 2005 में प्रभात खबर से जुड़ कर लगातार 21 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. अभी प्रभात खबर सुलतानगंज भागलपुर क्षेत्र में काम कर रहे हैं.हर पल बदलते सामाजिक घटनाक्रम पर पैनी नजर रखते हुए नए कंटेंट के साथ खबरों के लिए प्रभात खबर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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