दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यकों को समाज परिवर्तन के लिए संघर्ष की आवश्यकता

दलित विकास समिति की ओर से शनिवार को सूजागंज बाजार स्थित होटल सभागार में डॉ आंबेडकर की जयंती पर संविधान बचाओ विषयक परिचर्चा हुई

दलित विकास समिति की ओर से शनिवार को सूजागंज बाजार स्थित होटल सभागार में डॉ आंबेडकर की जयंती पर संविधान बचाओ विषयक परिचर्चा हुई. मुख्य वक्ता प्रो विलक्षण बौद्ध ने डॉ आंबेडकर आधुनिक भारत के निर्माता थे. आज संविधान विरोधियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती डॉ आंबेडकर के विचार ही हैं. दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यकों को कंधे से कंधा मिलाकर समाज परिवर्तन के लिए संघर्ष की आवश्यकता है. राष्ट्र सेवा दल के प्रदेश अध्यक्ष उदय ने कहा कि डॉ आंबेडकर का विचार समाजवाद का आइना था, उन्होंने सामाजिक समता, स्वतंत्रता और बंधुता के साथ सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिया.

शोषणमुक्त जमाज के लिए संविधान और सामाजिक कार्य दोनों जरूरी

निर्मल ने कहा कि सभी संसाधन पर एससी, एसटी ओबीसी माइनोरिटी का पहला हक होना ही चाहिए. विषय प्रवेश रामशरण ने किया और समाज को शोषणमुक्त बनाने के लिए संविधान और सामाजिक कार्य दोनों को जरूरी बताया. अध्यक्षीय भाषण देते हुए दलित विकास समिति ई अखिलेश्वर पासवान ने कहा कि आज के दौर में जब धर्म के नाम पर पाखंड एक बार पुनः सिर चढ़ कर बोल रहा है. ऐसे में डाॅ आंबेडकर का विज्ञानवादी विचारों को याद करना ही चाहिए. मनोज कुमार, सार्थक भरत, मनीष कुमार, रवि कुमार भानु, योगेंद्र दास आदि वक्ताओं ने अपना विचार रखा. कार्यक्रम का संचालन दलित विकास समिति के सचिव राम पूजन ने किया.

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