भागलपुर: गंगा-कोसी के उफान से ब्रह्मोत्तर तटबंध की स्थिति नाजुक, दरारें उभरने से कटान का मंडराया खतरा; गोपालपुर व रंगरा पर संकट

भागलपुर में गंगा और कोसी नदियों के बढ़ते जलस्तर से ब्रह्मोत्तर तटबंध की स्थिति गंभीर हो गई है. पिछले साल कटे हिस्से में फिर मिट्टी धंसने और दरारें उभरने से स्थानीय लोगों में बाढ़ का भय व्याप्त है. तटबंध टूटने पर गोपालपुर और रंगरा प्रखंडों में भीषण तबाही की आशंका है.

भागलपुर जिले में गंगा और कोसी नदी के जलस्तर में हो रही लगातार वृद्धि से तटवर्ती इलाकों में तबाही की आशंका गहराने लगी है. गोपालपुर प्रखंड अंतर्गत संवेदनशील 'ब्रह्मोत्तर तटबंध' की स्थिति बेहद नाजुक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है. पिछले वर्ष जिस स्थान पर तटबंध कटा था, उसी हिस्से में एक बार फिर तेज गति से मिट्टी का धसान शुरू हो गया है और बांध पर कई जगह लंबी दरारें उभर आई हैं. नदी के भारी दबाव के कारण ग्रामीणों में तटबंध टूटने का खौफ है, जिससे दर्जनों पंचायतों पर भीषण बाढ़ का संकट मंडराने लगा है.

पिछले साल कटे हिस्से में फिर धंसी मिट्टी, उभरीं दरारें

गंगा और कोसी के दोहरे दबाव से तटबंध पर भारी खतरा उत्पन्न हो गया है:

  • मिट्टी का धसान: स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछले वर्ष जिस संवेदनशील हिस्से में कटान हुआ था, ठीक उसी जगह नदी की तेज धार के कारण फिर से मिट्टी नीचे खिसकने लगी है.
  • उभरीं दरारें: तटबंध की सतह पर कई स्थानों पर चौड़ी दरारें साफ दिखाई दे रही हैं, जो बांध की आंतरिक कमजोरी और कभी भी ध्वस्त होने के खतरे का सीधा संकेत दे रही हैं.
  • दहशत में ग्रामीण: कटान की तेज होती रफ्तार को देखकर आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है और लोग किसी बड़ी अनहोनी की आशंका से सहमे हुए हैं.

बांध टूटा तो गोपालपुर मुख्यालय और रंगरा प्रखंड में मचेगी तबाही

ब्रह्मोत्तर तटबंध की भौगोलिक स्थिति पूरे इलाके की सुरक्षा के लिए रीढ़ मानी जाती है:

  • गोपालपुर पर सीधा असर: यदि समय रहते तटबंध को नहीं बचाया गया और कटान हुआ, तो बाढ़ का पानी सीधे गोपालपुर प्रखंड मुख्यालय सहित पूरे प्रखंड क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेगा.
  • रंगरा की पंचायतें होंगी जलमग्न: इसके साथ ही पड़ोसी रंगरा चौक प्रखंड की अधिकांश पंचायतों में जलप्रलय जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाएगी, जिससे हजारों की आबादी बेघर हो सकती है.

जल संसाधन विभाग से तत्काल फ्लड फाइटिंग की मांग

स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन व जल संसाधन विभाग से तत्काल एक्शन लेने की गुहार लगाई है:

  • बालू भरी बोरियों से सुरक्षा: ग्रामीणों ने मांग की है कि संवेदनशील स्थलों पर तुरंत जियो बैग (बालू भरी बोरियां) और बोल्डर डालकर क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत (फ्लड फाइटिंग) शुरू की जाए.
  • 24 घंटे निगरानी की आवश्यकता: लोगों का कहना है कि विभाग को किसी बड़ी तबाही का इंतजार किए बिना दिन-रात पेट्रोलिंग कर तटबंध की तकनीकी निगरानी करनी चाहिए, ताकि संभावित विनाश को समय रहते टाला जा सके.


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By Vipin Thakur

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