bhagalpur news. एमबीए विभाग में 30 लाख से अधिक पुस्तक खरीदारी की होगी जांच, कमेटी गठित

टीएमबीयू के एमबीए विभाग में 30 लाख से अधिक राशि से पुस्तक खरीद में धांधली की शिकायत व एमबीए विभाग के निदेशक की नियुक्ति में अनियमितता मामले में लगे आरोप की जांच होगी

टीएमबीयू के एमबीए विभाग में 30 लाख से अधिक राशि से पुस्तक खरीद में धांधली की शिकायत व एमबीए विभाग के निदेशक की नियुक्ति में अनियमितता मामले में लगे आरोप की जांच होगी. विवि के प्रभारी कुलपति प्रो विमलेंदु शेखर झा के आदेश पर रजिस्ट्रार प्रो रामाशीष पूर्व ने छह सदस्यीय कमेटी की अधिसूचना जारी की है. कमेटी में पीजी सांख्यिकी विभाग के हेड प्रो निसार अहमद संयोजक है. जबकि सिंडिकेट सदस्य डॉ मृत्युंजय सिंह गंगा, डॉ मुश्फिक आलम, कॉलेज इंस्पेक्टर साइंस प्रो रंजना, कॉलेज इंस्पेक्टर आर्ट्स-कॉमर्स प्रो सुरेंद्र कुमार सिंह सदस्य और सदस्य सचिव रजिस्ट्रार प्रो रामाशीष पूर्वे शामिल हैं. विवि प्रशासन ने कमेटी से एक माह के भीतर रिपोर्ट मांगी है, ताकि लोकभवन को रिपोर्ट भेजा जा सके. विभाग के पूर्ववर्ती छात्र संतोष कुमार ने जिला लोक शिकायत निवारण कोषांग से इस शर्त पर वापस लिया है कि पहले उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनायी जाये. इस बाबत विवि प्रशासन ने नौ फरवरी को कमेटी गठित की. तब जाकर बुधवार को जिला लोक शिकायत निवारण कोषांग में पूर्ववर्ती छात्र ने आवेदन देकर शिकायत वापस ली. साथ ही जांच कमेटी की कॉपी कोषांग को सौंपी है.

प्रभात नॉलेज

एमबीए विभाग के पूर्ववर्ती छात्र ने पूर्व कुलपति प्रो जवाहर लाल के कार्यकाल में एमबीए विभाग में 30 लाख से अधिक राशि से पुस्तक की खरीदारी पर घांधली का आरोप लगाया था. उन्होंने जिला लोक शिकायत निवारण कोषांग दिये आवेदन में कहा था कि पुस्तक खरीदारी में विवि नियम-कानून की अनदेखी की गयी. विभाग में परचेजिंग कमेटी की बैठक नहीं हुई और ना ही इवैल्यूएशन कमेटी से अनुमोदन ली गयी. 280 किताब खरीदने के लिए फाइल बनी, लेकिन 809 किताब खरीद ली गयी. किताब की जो खरीदारी की गयी है, छात्रों के उपयोग लायक है ही नहीं. उन्होंने लाखों रुपये के घोटाले की आशंका जतायी है. साथ ही एमबीए विभाग में उस समय अन्य सामानों की भी लाखों रुपये से खरीदारी की गयी. उन्होंने वित्तीय अनियमितता का आरोप भी लगाया था.

जांच कमेटी बनी, तो वापस ली शिकायत

विभाग के पूर्ववर्ती छात्र संतोष कुमार ने कहा कि मामले में विवि प्रशासन ने जांच कमेटी गठित की है. तब जाकर जिला लोक शिकायत निवारण कोषांग से शिकायत वापस ली है. कहा कि कमेटी बनाने के शर्त पर ही मामले को वापस लिया है. विवि प्रशासन से मामले में निष्पक्ष रूप से जांच कर सच्चाई लाने का अनुरोध किया है.

मामले में चार बार हो चुकी थी सुनवाई

जिला लोक शिकायत निवारण कोषांग में मामले में चार बार सुनवाई हो चुकी थी. पहली सुनवाई 17 दिसंबर 2025, सात जनवरी 2026, 21 जनवरी 2026 व 31 जनवरी 2026 को, लेकिन 11 फरवरी 2026 की सुनवाई में आवेदनकर्ता ने कोषांग से शिकायत वापस ली.

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By Atul kumar

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