बिहार सरकार के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजस्व प्राप्ति बड़ी चुनौती बन गई है. विभाग से निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 62.02 प्रतिशत राजस्व ही प्राप्त हो सका है. इसके मद्देनजर विभाग ने निबंधन व्यवस्था में सख्ती बढ़ाते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किया है. विभागीय सचिव अजय यादव द्वारा जारी पत्र के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिए 9130.00 करोड़ रुपये का राजस्व का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि 19 जनवरी 2026 तक महज 5662.21 करोड़ रुपये की वसूली हो पाई है. शेष राजस्व की प्राप्ति के लिए वित्तीय वर्ष के बचे समय में संग्रहण बढ़ाना अनिवार्य बताया गया है.
गुणवत्तापूर्ण स्थल निरीक्षण का निर्देश
राजस्व क्षति को रोकने के लिए निबंधन पूर्व दस्तावेजों का अनिवार्य और गुणवत्तापूर्ण स्थल निरीक्षण कराने का निर्देश दिया गया है. निरीक्षण के दौरान भूमि और उस पर बनी संरचनाओं की वास्तविक श्रेणी और क्षेत्रफल की सही जानकारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है, ताकि कम मूल्यांकन के कारण होने वाली राजस्व हानि रोकी जा सके. इसके लिए जीआईएस तकनीक के उपयोग को भी अनिवार्य किया गया है. नगर निकाय क्षेत्रों में स्थल निरीक्षण सामान्यतः निबंधन पदाधिकारी स्वयं करेंगे. अन्य क्षेत्रों में कार्यालय अधीक्षक, प्रधान लिपिक सहित अन्य कर्मियों को निरीक्षण के लिए अधिकृत किया जाएगा. कर्मियों द्वारा किए गए कुल स्थल निरीक्षणों में से 10 प्रतिशत का क्रॉस वेरिफिकेशन स्वयं निबंधन पदाधिकारी करेंगे. प्रत्येक स्थल निरीक्षण की प्रविष्टि कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में दर्ज करना अनिवार्य होगा.
तीन दिनों के भीतर करना होगा आई-फी दस्तावेजों का स्थल निरीक्षण
आई-फी वाले दस्तावेजों का स्थल निरीक्षण निबंधन से पूर्व आवेदन की तिथि से तीन दिनों के भीतर करना होगा. इसके साथ ही लंबित खनन लीज नवीकरण, नई लीज के दस्तावेज, 3213 नीलामवाद मामलों तथा 47 ए के 838 लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन के निर्देश दिए गए हैं. इन मामलों में सौ करोड़ रुपये से अधिक की संभावित राजस्व वसूली निहित है. फ्लैट निबंधन को बढ़ावा देने के लिए बिल्डर्स एसोसिएशन और रेरा से समन्वय स्थापित करने, चलंत निबंधन इकाई के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने और सभी निबंधन कार्यालयों में सच्ची प्रतिलिपि व एनईसी ऑनलाइन निर्गत करने के भी निर्देश दिए गए हैं. विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित राजस्व लक्ष्य की प्राप्ति सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी.
