Bhagalpur News: भागलपुर की पहचान अब सिर्फ विक्रमशिला, सिल्क और गंगा तक सीमित नहीं रह गयी है. अंग प्रदेश की लोककला मंजूषा ने देश के सबसे लोकप्रिय क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति के मंच पर अपनी खास पहचान दर्ज करायी है. KBC-18 के नौवें एपिसोड में महानायक अमिताभ बच्चन ने हॉट सीट पर बैठीं महाराष्ट्र की रुचित अधलराव से भागलपुर की मंजूषा कला से जुड़ा सवाल पूछा.
सवाल था कि अंग प्रदेश की कौन-सी चित्रकला है, जिसके नाम का अर्थ 'बक्सा' होता है?
रुचित अधलराव ने बिना देर किये इसका जवाब मंजूषा दिया. सही जवाब के साथ वह खेल में आगे बढ़ीं और 25 लाख रुपये तक पहुंच गयीं. टीवी के लोकप्रिय मंच पर मंजूषा कला का नाम आने से भागलपुर के कलाकारों और कला प्रेमियों में खुशी की लहर है.
अमिताभ बच्चन के सवाल से घर-घर पहुंची मंजूषा
20 अगस्त को प्रसारित KBC-18 के इस एपिसोड में भागलपुर की लोककला मंजूषा का जिक्र हुआ. अंग क्षेत्र से जुड़ी इस पारंपरिक चित्रकला के बारे में सवाल पूछे जाने के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय कला जगत में इसकी चर्चा तेज हो गयी.
मंजूषा का अर्थ बक्सा होता है. अंग क्षेत्र की इस लोककला की अपनी विशिष्ट शैली, रंग और कथानक हैं. खास तौर पर बिहुला-विषहरी की लोकगाथा से इसका गहरा संबंध माना जाता है.
मंजूषा कला में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक रंग भी इसकी अलग पहचान बनाते हैं. KBC के एपिसोड में इसके तीन प्रमुख रंगों गुलाबी, हरा और पीला के प्रयोग का भी उल्लेख हुआ.
कभी अंग की गलियों तक सीमित थी कला, अब KBC के मंच पर चर्चा
मंजूषा केवल चित्र बनाने की कला नहीं है. यह अंग क्षेत्र की लोकस्मृति, धार्मिक मान्यताओं और लोककथाओं को चित्रों के जरिये अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी रही है.
इस कला की सबसे चर्चित कथा बिहुला और विषहरी की है. यही वजह है कि मंजूषा चित्रों में लोककथाओं और पारंपरिक प्रतीकों का विशेष महत्व दिखाई देता है.
भागलपुर के कलाकार लंबे समय से इस लोककला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयास में जुटे हैं. KBC जैसे लोकप्रिय कार्यक्रम में इसका उल्लेख होना इन कलाकारों के लिए बड़ा मंच माना जा रहा है.
बॉलीवुड के बाद अब KBC में मंजूषा की चर्चा
अंग जनपद की लोकपरंपराओं ने इससे पहले भी देश के बड़े मंचों का ध्यान खींचा है. बिहुला-विषहरी की कथा पर 1970 के दशक में पृथ्वीराज कपूर से जुड़ी फिल्म का भी उल्लेख मिलता है.
अब मंजूषा कला का जिक्र KBC जैसे देशव्यापी टीवी शो में होना इस कला की पहुंच को और व्यापक कर सकता है.
मंजूषा गुरु मनोज पंडित का कहना है कि अंग क्षेत्र की इस कला को आगे बढ़ाने में समाज के हर वर्ग की भूमिका जरूरी है. उनका मानना है कि मंजूषा कला जल्द ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी पहचान बनाएगी.
'घर-घर मंजूषा, हर घर मंजूषा' अभियान से जुड़ रहे लोग
मंजूषा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए भागलपुर में 'घर-घर मंजूषा, हर घर मंजूषा' अभियान भी चलाया जा रहा है. इंटक भागलपुर चैप्टर और स्पीक की ओर से चलाये जा रहे इस अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को इस लोककला से जोड़ना है.
अभियान से जुड़े लोगों ने एक लाख आठ लोगों को मंजूषा कला के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया है. ऐसे में KBC पर मंजूषा का सवाल आना इस अभियान के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है.
पवन सागर को भी KBC ऑनलाइन में मिला था यही सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में एक दिलचस्प संयोग भी सामने आया है. स्टेट अवार्ड से सम्मानित भागलपुर के मंजूषा कलाकार पवन कुमार सागर जब KBC ऑनलाइन खेल रहे थे, तब उन्हें भी मंजूषा से जुड़ा यही सवाल मिला था.
पवन सागर ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन खेल के दौरान यह सवाल देखा था. उनके लिए यह खास अनुभव इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि वह स्वयं मंजूषा कला से जुड़े कलाकार हैं.
Bhagalpur News: भोपाल के बाद बेंगलुरु में भी दिखाया मंजूषा का हुनर
पवन कुमार सागर हाल के दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर मंजूषा कला का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. करीब दो महीने पहले उन्होंने भोपाल में अपनी कला का प्रदर्शन किया था. इसके बाद बेंगलुरु में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में भी भाग लिया.
भारतीय विद्या भवन, बेंगलुरु के 60 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित 'चित्र भारती राष्ट्रीय कार्यशाला' में पवन सागर ने बिहार का प्रतिनिधित्व किया था. भागलपुर के निर्मला देवी घराना से जुड़े पवन सागर को राज्य पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है.
KBC में मंजूषा का जिक्र ऐसे समय हुआ है, जब स्थानीय कलाकार इस पारंपरिक कला को नयी पीढ़ी और बड़े मंचों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. अमिताभ बच्चन के सवाल के जरिये देशभर के दर्शकों तक अंग प्रदेश की इस लोककला का नाम पहुंचना भागलपुर की सांस्कृतिक पहचान के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण माना जा रहा है.
